प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान, अब बिना PUC नहीं मिलेगा ईंधन

दशहरा के बाद दिल्ली की हवा में घुले जहर और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने 'विंटर एक्शन प्लान' को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तेजी से गिर रहा है, जिससे आम लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। 21 अक्टूबर की सुबह तक AQI 238 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि पूसा, जहांगीरपुरी और चांदनी चौक जैसे इलाकों में हालात और भी गंभीर रहे, जहां AQI 357 तक दर्ज किया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक के लिए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
सबसे बड़ा प्रहार उन वाहनों पर किया गया है जिनके पास प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं है। शहर के 500 पेट्रोल पंपों पर 'नो PUC, नो फ्यूल' पॉलिसी लागू कर दी गई है। यहां ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दी जाएगी।
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प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई अन्य कड़े नियम भी तय किए हैं, जो आपकी दिनचर्या को प्रभावित करेंगे:
- बाहरी वाहनों पर रोक: 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत नॉन-BS-VI वाहनों के शहर में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- वर्क फ्रॉम होम: ट्रैफिक और उत्सर्जन कम करने के लिए सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम अनिवार्य किया गया है।
- पार्किंग फीस: अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क को 28 फरवरी तक दोगुना कर दिया गया है।
- निर्माण कार्य पर ब्रेक: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाले कामों पर रोक रहेगी, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण कार्यों को पूरी तरह बंद रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि जनता के सांस लेने के अधिकार की रक्षा के लिए ये कदम उठाना बेहद जरूरी है। वहीं, पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि हालांकि अभी हवा की गुणवत्ता गिर रही है, लेकिन साल के अधिकांश समय में दिल्ली ने 2016 के बाद का अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है।