दिल्ली में प्रदूषण पर प्रहार: विंटर एक्शन प्लान लागू, निर्माण कार्यों पर लगी सख्ती
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू किया है। निर्माण कार्यों पर पाबंदी और भारी जुर्माने की तैयारी।

राजधानी दिल्ली में सर्दियों के साथ आने वाले जहरीले धुंध और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अपना 'विंटर एक्शन प्लान' आधिकारिक तौर पर सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य शहर की हवा को सांस लेने लायक बनाना और प्रदूषण के स्तर को कम करना है।
इस योजना के तहत सबसे ज्यादा सख्ती निर्माण कार्यों पर देखी जा रही है। प्रशासन ने धूल नियंत्रण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए रोजाना करीब 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने का लक्ष्य रखा है। अभियान के पहले ही दिन 300 जगहों की जांच की गई, जिसमें 32 साइटें नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं। इन सभी साइटों को बंद करने का निर्देश दिया गया है और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही, पर्यावरण मुआवजे के रूप में 9.8 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
निर्माण कार्यों पर पाबंदी और निगरानी के कड़े इंतजाम
प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने निर्माण गतिविधियों के लिए एक स्तरीय प्रतिबंध प्रणाली लागू की है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाले सभी बाहरी सिविल कार्यों और तोड़-फोड़ पर पाबंदी रहेगी। वहीं, 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा, जिसमें केवल आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट दी गई है। हालांकि, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे आंतरिक कार्यों की अनुमति है, बशर्ते वे धूल नियंत्रण मानकों का पालन करें।
निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। AI-सक्षम कैमरों के जरिए रीयल-टाइम डेटा एक केंद्रीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर को भेजा जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और नगर निकायों की 334 समर्पित टीमें तैनात की गई हैं। इस अभियान में केंद्र सरकार, CAQM, CPCB, दिल्ली पुलिस और DMRC के बीच आपसी समन्वय बनाया गया है।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 'नो PUC, नो फ्यूल' नीति लागू की गई है, जिसके तहत बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, BS-VI मानकों को पूरा न करने वाले गैर-दिल्ली पंजीकृत वाहनों के शहर में प्रवेश पर 31 जनवरी तक रोक लगा दी गई है। ट्रैफिक कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50% वर्क-फ्रॉम-होम अनिवार्य किया गया है और मेट्रो पार्किंग को छोड़कर अन्य अधिकृत पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है।