दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू, 1 नवंबर से बदल जाएंगे नियम

दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू किया है। निर्माण कार्यों पर रोक और बाहरी वाहनों के लिए नए नियम लागू होंगे।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू, 1 नवंबर से बदल जाएंगे नियम

राजधानी में हर साल सर्दियों में बढ़ने वाले जहरीले स्मॉग और प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अपना 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार कर लिया है। यह योजना 1 नवंबर 2026 से लागू होगी और 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में तैयार इस प्लान का मकसद शहर की हवा को साफ रखना और प्रदूषण के स्तर को कम करना है।

इस योजना के तहत निर्माण कार्यों पर बेहद सख्त पाबंदी लगाई गई है। 1 नवंबर से ही धूल उड़ाने वाले सभी कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन कामों पर रोक रहेगी, हालांकि घर के अंदर होने वाले पेंट और रेनोवेशन के काम को इससे बाहर रखा गया है। इतना ही नहीं, 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से बैन रहेगा। इन नियमों की निगरानी के लिए AI कैमरों और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाएगा।

बाहरी वाहनों की एंट्री पर रोक और 'नो PUC, नो फ्यूल' नियम

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प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने बाहरी वाहनों के लिए कड़े नियम बनाए हैं। 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड वेहिकल्स, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है। साथ ही, शहर के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर 'नो PUC, नो फ्यूल' पॉलिसी लागू होगी, यानी बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के ईंधन नहीं मिलेगा। इसकी निगरानी ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए की जाएगी।

ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए नगर निगम की पार्किंग फीस (मेट्रो स्टेशनों को छोड़कर) दोगुनी कर दी गई है। इसके अलावा, सरकारी और प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% वर्क-फ्रॉम-होम या स्टैगर्ड वर्किंग ऑवर्स (अलग-अलग समय पर ऑफिस आना) का निर्देश दिया गया है। समय में बदलाव करते हुए दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक और MCD दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेंगे।

इस पूरी मुहिम को सफल बनाने के लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग मिलकर काम कर रहे हैं।

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