दिल्ली सरकार ने बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए व्यापक विंटर एक्शन प्लान 2026-27 की घोषणा कर दी है, जो 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। इस योजना के तहत कई कड़े नियम लागू किए गए हैं ताकि राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके और प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। इस खबर से जुड़े सभी विवरण नीचे दिए गए हैं।
दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड जो पेट्रोल और डीजल वाहन बीएस-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते, उनके राजधानी में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, हालांकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट दी गई है। निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत स्थलों पर
पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा, लेकिन दिल्ली मेट्रो पार्किंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस surcharge से छूट दी गई है।
कार्यस्थल की नीतियों में बदलाव करते हुए 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच सरकारी और निजी कार्यालयों के
50% कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने का निर्देश दिया गया है। ट्रैफिक जाम कम करने के लिए कार्यालय के समय में बदलाव किया गया है, जिसके तहत एमसीडी कार्यालय सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10:00 से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे।
निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए गए हैं। धूल पैदा करने वाले बाहरी सिविल कार्यों पर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रतिबंध रहेगा, जबकि 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक
सभी निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और सभी साइटों पर 100% सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य होगी। इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करके नो पीयूसीसी, नो फ्यूल अभियान तेज कर दिया गया है। इन नीतियों को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद अंतिम रूप दिया गया, जिसमें दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सरसा भी शामिल थे। नियमों की निगरानी एक एआई कमांड सेंटर द्वारा की जाएगी।