दिल्ली में भारी बारिश से जलभराव का संकट गहराया, ड्रेनेज व्यवस्था पर उठे सवाल और जवाबदेही की मांग

दिल्ली-एनसीआर में 9-10 अगस्त 2026 को हुई भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर बड़े पैमाने पर waterlogging यानी जलभराव की समस्या सामने आई है। इस स्थिति ने शहर को 'waterlogging-free' बनाने के दावों की पोल खोल दी है। लुटियंस दिल्ली, खान मार्केट और लोधी रोड जैसे प्रमुख इलाकों में कई फीट पानी भर गया, जिससे ड्रेनेज सिस्टम की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा शास्त्री पार्क, संगम विहार, छतरपुर और ग्रेटर कैलाश-2 जैसे उपनगरीय इलाकों में भी भारी जलभराव हुआ, जहां पानी घरों और दुकानों के अंदर घुस गया और सड़कों पर बच्चों के 'राफ्टिंग' करने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
बारिश के आंकड़े और ट्रैफिक पर असर
8 अगस्त 2026 को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान 57.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप जलभराव की 81 शिकायतें और पेड़ गिरने की 32 घटनाएं सामने आईं, जिससे पूरे शहर में traffic disruption यानी यातायात बाधित हुआ। इस स्थिति को लेकर दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अधिकारियों पर ड्रेनेज सफाई में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने और 2024 के हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अनिवार्य थर्ड-पार्टी ऑडिट न कराने का आरोप लगाया। इसके जवाब में लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रही है और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण यह अस्थायी समस्याएं आ रही हैं। वर्मा ने पहले ही 24x7 कंट्रोल रूम की घोषणा की थी, जो 179 सीसीटीवी कैमरों से 45 संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहा है और ऑटोमैटिक पंप सिस्टम का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने मानसून से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए 1 जुलाई से 30 सितंबर तक सड़क की खुदाई पर प्रतिबंध लगा दिया है।
विशेषज्ञों के सुझाव और सरकारी योजनाएं
प्रमुख थिंक टैंक, काउंसिल ऑन एनर्जी, पर्यावरण और जल (CEEW) ने शहरी बाढ़ से निपटने के लिए एक तीन-सूत्रीय मास्टर प्लान का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 30 साल के ड्रेनेज ऑडिट, उच्च जोखिम वाले हॉटस्पॉट की पहचान और मानसून से पहले, दौरान व बाद के लिए एक चरणबद्ध एक्शन प्लान की वकालत की गई है। इस बीच, दिल्ली सरकार गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए एक नई बोरवेल नीति भी विकसित कर रही है, जिसके तहत सभी बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना और नई स्थापना के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाएगा। इन सभी पहलों के बावजूद, जनसत्ता के संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में इस समस्या का बार-बार सामने आना यह साबित करता है कि राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर पारदर्शी क्रियान्वयन और मजबूत जवाबदेही की जरूरत है ताकि वास्तव में एक 'waterlogging-free' दिल्ली बनाई जा सके।