दिल्ली में कचरा प्रबंधन का बड़ा संकट: रोजाना 44 प्रतिशत कचरा बिना प्रोसेस के लैंडफिल में

Kittu Kumari7 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में कचरा प्रबंधन का बड़ा संकट: रोजाना 44 प्रतिशत कचरा बिना प्रोसेस के लैंडफिल में

देश की राजधानी दिल्ली इस समय कचरा प्रबंधन की एक गंभीर चुनौती से जूझ रही है। शहर में हर दिन लगभग 13,860 टन कचरा पैदा होता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसका 44.16 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 6,131 टन कचरा बिना किसी प्रोसेसिंग के ही लैंडफिल साइटों पर फेंक दिया जाता है। इस वजह से ओखला, भलस्वा और गाजीपुर जैसे लैंडफिल साइटों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और पिछले एक साल में यहां 1,597 टन अतिरिक्त अनप्रोसेस्ड कचरा जमा हो गया है।

MCD की नई रणनीति और प्रोसेसिंग प्लांट्स की तैयारी

इस संकट से निपटने के लिए नगर निगम (MCD) ने कमर कसी है। 2 अक्टूबर 2026 को हुई एक बैठक में 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 2026' को सख्ती से लागू करने और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही गई है। प्रशासन अब विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग (Decentralized Processing) पर जोर दे रहा है, जिसके तहत 6,000 टन क्षमता वाले पांच नए प्लांट बनाने की योजना है। उम्मीद है कि ये प्लांट दिसंबर के मध्य या जनवरी तक शुरू हो जाएंगे।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ओखला, गाजीपुर और सिंहुला में नए प्रोसेसिंग केंद्रों की आधारशिला रखी है। उन्होंने बताया कि पिछले 18 महीनों में लैंडफिल साइटों से 100 एकड़ जमीन को वापस हासिल किया गया है। सरकार की रणनीति दोतरफा है: एक तरफ पुराने कचरे के पहाड़ों को खत्म करना और दूसरी तरफ रोजाना पैदा होने वाले 3,000 से 4,000 मीट्रिक टन ताजे कचरे को जमा होने से रोकना।

MCD के मुख्य अभियंता अजय अग्रवाल के अनुसार, पुराने कचरे के निस्तारण में अच्छी प्रगति हुई है। कुल 280 लाख टन कचरे में से करीब 200 से 220 लाख टन साफ किया जा चुका है। लक्ष्य यह है कि ओखला और भलस्वा लैंडफिल को तीन महीने के भीतर पूरी तरह साफ कर लिया जाए, जबकि गाजीपुर साइट को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह क्लियर करने का लक्ष्य है।

शहर को स्वच्छ बनाने के लिए 823 'गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स' (GVPs) की पहचान की गई थी, जिनमें से 230 को खत्म किया जा चुका है। इसके अलावा, 2 से 17 अक्टूबर तक एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि और अधिक गंदगी वाले पॉइंट्स को साफ किया जा सके।

हालांकि, चुनौती अभी भी बड़ी है। वर्तमान में चल रहे चार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट शहर की जरूरत के मुकाबले नाकाफी हैं और ओखला कंपोस्टिंग प्लांट का अपग्रेडेशन भी तय समय से पीछे चल रहा है। अनुमान है कि 2047 तक दिल्ली में रोजाना कचरे की मात्रा बढ़कर 25,000 टन हो जाएगी, जिसके लिए अब से ही बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को विकसित करना जरूरी है।

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