दिल्ली में कचरा संकट: अब गंदगी फैलाने पर लगेगा 10 हजार का जुर्माना

Kittu Kumari8 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में कचरा संकट: अब गंदगी फैलाने पर लगेगा 10 हजार का जुर्माना

देश की राजधानी दिल्ली इस समय कचरा प्रबंधन के एक गंभीर संकट से जूझ रही है। शहर में हर दिन लगभग 13,500 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन इसे प्रोसेस करने की क्षमता केवल 8,000 मीट्रिक टन है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वास्तव में केवल 7,611 टन कचरे का ही निपटारा हो पा रहा है। इसका मतलब है कि करीब 36% कचरा सीधे भलस्वा और गाजीपुर जैसे लैंडफिल साइट्स पर फेंका जा रहा है, जिससे पूरे शहर में स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।

इस विकट स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026' लागू किए हैं। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इन नियमों के तहत अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग करना (सोर्स सेग्रिगेशन) अनिवार्य होगा। साथ ही, 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजा भी तय किया गया है।

MCD की सख्ती और नए प्लांट की तैयारी

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कचरे की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कमर कस ली है। 3 अक्टूबर 2026 को हुई एक विशेष बैठक में तय किया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों पर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, कॉलोनियों की श्रेणी के हिसाब से 50 रुपये से 200 रुपये तक का यूजर शुल्क भी लागू किया जाएगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ओखला, सिंहुला और गाजीपुर में तीन नए वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की आधारशिला रखी है, जिनकी कुल क्षमता 2,900 टन प्रतिदिन होगी। गाजीपुर में एक 300 टन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट भी लगाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले 18 महीनों में लैंडफिल साइट्स से करीब 217.17 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे को हटाया गया है, जिससे लगभग 100 एकड़ जमीन खाली हुई है। निगम का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक ओखला और भलस्वा लैंडफिल को पूरी तरह साफ करने का है, जबकि गाजीपुर साइट को दिसंबर 2027 तक क्लियर करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा, शहर में 6,000 टन क्षमता के पांच विकेंद्रीकृत (Decentralized) प्रोसेसिंग प्लांट बनाए जा रहे हैं। साथ ही, शहर के उन इलाकों को चिन्हित कर 15 दिनों का विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जहां कचरे के ढेर सबसे ज्यादा जमा होते हैं।

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