दिल्ली में मतदाता सूची से कट सकते हैं एक-तिहाई नाम, ड्राफ्ट 24 अगस्त को होगा जारी

दिल्ली में आगामी इलेक्टोरल रोल रिवीजन (Electoral Roll Revision) के पूरा होने के करीब पहुंचने के साथ ही मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम कम होने का खतरा पैदा हो गया है। 16 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (Chief Electoral Officer) के पास केवल 9.747 मिलियन एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration forms) ही जमा और अपलोड किए गए हैं। यह डेटा मूल 14.5 मिलियन रजिस्टर्ड वोटर्स का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा ही कवर करता है। इसके परिणामस्वरुप, लगभग 4.762 मिलियन यानी शहर के कुल वोटर्स का एक-तिहाई हिस्सा 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल (Draft electoral roll) में 'अनकलेक्टिबल' (Uncollectible) के रूप में चिह्नित किया जा सकता है।
ऑडिट प्रक्रिया और कारण
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा 14 मई 2026 को बड़े पैमाने पर यह ऑडिट शुरू किया गया था। इस प्रक्रिया में नागरिकों की पहचान अनुपस्थित (absent), मृत (deceased), स्थानांतरित (shifted) या डुप्लीकेट (duplicates) के रूप में की जाती है, जिन्हें सामूहिक रूप से ASDD श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली का संभावित 33 प्रतिशत विलोपन दर (deletion rate) सर्वे किए गए सभी शहरी केंद्रों में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा हैदराबाद, गुरुग्राम और पुणे के आंकड़ों से भी ज्यादा है।
नाम जुड़वाने का अवसर
जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए जाएंगे, उन्हें अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले एक मौका मिलेगा। वोटर्स 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले औपचारिक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए नाम को फिर से शामिल करने का अनुरोध कर सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से अपडेट करना है।