दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम तेजी से चल रहा है। इस प्रक्रिया से 3.31 करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हुए हैं, जिन्हें 2002 की मतदाता सूची के साथ तार्किक विसंगतियों या मैपिंग के मुद्दों के कारण नोटिस मिले हैं। दिल्ली के CEO अशोक कुमार की देखरेख में चलने वाली इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं की पहचान की जा रही है जिनके नाम में mismatches, उम्र का अंतर, डुप्लीकेट प्रविष्टियां, या माता-पिता के एक जोड़े के लिए छह से अधिक बच्चों की प्रविष्टियां पाई गई हैं। इस बारे में अधिक जानकारी न्यूज ऑन एयर पर देखें। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने शुरू कर दिए हैं ताकि मतदाताओं को चुनाव दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
इस अभियान के तहत दावों और आपत्तियों के निपटान में तेजी लाने के लिए सहायक electoral पंजीकरण अधिकारियों (AEROs) की संख्या 300 से बढ़ाकर 900 कर दी गई है। नोटिस पाने वाले प्रमुख लोगों में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू, पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हैं।
SIR प्रक्रिया 20 जून 2026 को शुरू हुई थी और घर-घर का सर्वे 30 जून 2026 को शुरू हुआ था। मसौदा मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद 30 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय रखा गया था।
अधिकारियों के अनुसार नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम काटना नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक सत्यापन प्रक्रिया है। बिना औपचारिक सुनवाई और आधिकारिक आदेश के किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा, और मतदाता भारत निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल के जरिए खुद सत्यापन कर सकते हैं। दावों और आपत्तियों का समाधान 29 अक्टूबर 2026 तक किया जाना तय है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
सार्वजनिक जागरूकता को लेकर इस अभियान को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, फिर भी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि सभी नागरिकों को आवश्यक सबूत जमा करने का पूरा मौका मिले।