दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: कम मतदान वाले क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा

दिल्ली में साल 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान सबसे कम हुआ था, वहां मतदाता सूची से नाम कटने का बड़ा खतरा बना हुआ है। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत इन क्षेत्रों में डिजिटलीकरण की दर दिल्ली के औसत से काफी कम पाई गई है। विश्लेषण से पता चलता है कि कम मतदान वाले 18 में से 17 निर्वाचन क्षेत्रों में डिजिटलीकरण की दर 67 प्रतिशत से भी कम है। यह पूरी प्रक्रिया बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन के माध्यम से चलाई जा रही है।
इस डेटा संग्रह के काम में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख मतदाताओं, यानी करीब 33 प्रतिशत को 'अनकलेक्टेबल' के रूप में चिन्हित किया गया है। इन लोगों के फॉर्म या तो जमा नहीं हुए या फिर उनका डिजिटलीकरण नहीं हो सका। इस कारण से इनके नाम आगामी ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने की पूरी संभावना है।
आगामी 31 अगस्त 2026 से लगभग 33 लाख मतदाताओं को अपनी पात्रता सत्यापित करने के लिए नोटिस भेजे जाएंगे। इनमें से 19 लाख मामले फॉर्म में गड़बड़ी से जुड़े हैं और 14 लाख मामले 2002 की एसआईआर सूची से डेटा न जुड़े होने के कारण हैं। कई बार समय सीमा बढ़ाने के बाद, अब संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की जाएगी। आप और अधिक जानकारी के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 30 सितंबर तक रहेगी और इनका समाधान 31 अक्टूबर तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक Kumar ने बताया कि मतदाता ceodelhi.gov.in, ईसीआई के वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप के जरिए अपनी स्थिति की जांच कर सकते हैं। राजनीतिक दलों की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने प्रवासी मतदाताओं को हटाने का आरोप लगाया है, जबकि दिल्ली कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 13,031 बूथ-स्तरीय एजेंट तैनात किए हैं।