दिल्ली में 33 लाख वोटर नोटिस पर चुनाव आयोग की सफाई, नाम नहीं काटे जाएंगे

भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में लगभग 33 लाख मतदाताओं को भेजे गए नोटिस पर स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा है कि यह डेटा सत्यापन और सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि मतदाता सूची से नाम हटाने का कदम। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया 30 जून 2026 को शुरू हुई थी और 31 अगस्त 2026 को इसका मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस मिलने का मतलब अयोग्यता नहीं है और किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए और आदेश पारित किए बिना नहीं हटाया जाएगा, जैसा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी की बैठक में बताया गया।
डेटा mismatches के कारण भेजे गए नोटिस
यह नोटिस ECINET प्रणाली द्वारा डेटा में अशुद्धियों या 2002 के एसआईआर डेटा से मिलान न होने के कारण जारी किए गए थे। चिह्नित 33 लाख मतदाताओं में एल.के. आडवाणी, एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल जैसी हस्तियां शामिल हैं। 25 सितंबर 2026 तक इन प्रमुख हस्तियों का फील्ड सत्यापन पूरा हो चुका है और उनके नाम अंतिम मतदाता सूची के लिए सुरक्षित कर लिए गए हैं। बूथ स्तर के अधिकारियों की टीमें आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर विवरण सत्यापित करने के लिए घर-घर जा रही हैं।
सत्यापन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तारीखें
33 लाख नोटिस के सत्यापन में तेजी लाने के लिए आयोग सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की संख्या 300 से बढ़ाकर 900 कर रहा है। मतदाताओं के पास नोटिस का जवाब देने के लिए 29 अक्टूबर 2026 तक का समय है और 27 सितंबर को सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। 20 दिन की समाधान योजना लागू है, जिसमें छोटी-मोटी विसंगतियों को 10 दिनों के भीतर हल किया जाना है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।