दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नोटिस के कारण करीब 32,27,443 मतदाता एक जटिल वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। स्पेलिंग की गलती और मैपिंग फेल होने जैसी समस्याओं के कारण इन नोटिसों से लोगों में चिंता बढ़ गई है। आंकड़ों के अनुसार, इन नोटिसों के तीन मुख्य कारण 'पिछले SIR से मैप न होना' (41.51%), 'माता-पिता के नाम में अंतर' (23.71%) और 'खुद के नाम में अंतर' (16.86%) हैं। इस बैकलॉग को दूर करने के लिए, 27 सितंबर 2026, रविवार को दिल्ली के सभी 14,987 मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप लगाए गए, हालांकि सर्वर धीमा होने के कारण लोगों को देरी का सामना करना पड़ा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाताओं का बोझ कम करने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है।
बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया है, जिससे नागरिकों को चुनाव कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम काटना नहीं है और औपचारिक सुनवाई के बिना किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए समय सीमा बढ़ा दी गई है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि अब 30 अक्टूबर 2026 है, जबकि नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 तय की गई है। दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर 2026 को जारी की जाएगी। चुनाव आयोग ईसीआईनेट के कामकाज और गैर-SIR अवधि के दौरान फॉर्म 6 के उपयोग की समीक्षा के लिए आईआईटी और आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञों वाली एक समिति भी बना रहा है।
इस वेरिफिकेशन प्रक्रिया में लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और जगदीप धनखड़ जैसी जानी-मानी हस्तियां भी शामिल रही हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.56 लाख नाम हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को यह निर्देश दिया गया है कि वे पर्याप्त हेल्प डेस्क बनाएं और यह सुनिश्चित करने के लिए रैन बसेरों व मजदूर बस्तियों में विशेष कैंप लगाएं कि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रह जाए।