दिल्ली में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में आ रही बड़ी मुश्किलें, 60% डिजिटलाइजेशन पूरा

दिल्ली में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां आ रही हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, डिजिटलाइजेशन का काम पूरा हो चुका है और 3 अगस्त 2026 तक वोटर डेटा का डिजिटलाइजेशन 60% तक पहुंच गया है, जबकि जनता से लगभग 80% फॉर्म कलेक्ट किए जा चुके हैं (Source)। निर्वाचन नामावलियों को अपडेट करने के लिए Special Intensive Revision (SIR) अभियान 30 जून 2026 को शुरू हुआ था। घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने की तारीख पहले 29 जुलाई 2026 तक तय थी, जिसे बढ़ाकर 8 अगस्त 2026 कर दिया गया है।
बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को आ रही परेशानियां
डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें वोटर्स द्वारा जरूरी दस्तावेज न दे पाना, घरों पर ताला लगा होना, किराएदारों का बार-बार आना-जाना, लगातार बदलते पते और लोगों का सहयोग न करना शामिल है। BLOs को फॉर्म खोने, गलत जानकारी और तकनीकी गड़बड़ियों जैसी समस्याओं की भी शिकायत मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि BLOs को अक्सर घरों के 5 या 6 चक्कर लगाने पड़ते हैं, क्योंकि वेरिफिकेशन पूरा करने के लिए तय किए गए सामान्य 3 दौरे ज्यादातर मामलों में पर्याप्त नहीं होते हैं।
वोटर लिस्ट से हट सकते हैं 20% से 25% नाम
वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव अधिकारियों का अनुमान है कि मौजूदा वोटर लिस्ट से लगभग 20% से 25% नाम हटाए जा सकते हैं। इस शुरुआती अनुमान की वजह दिल्ली की बड़ी प्रवासी आबादी, सरकारी कर्मचारियों के लगातार ट्रांसफर और लोगों द्वारा पता बदलने पर भी अपना रजिस्ट्रेशन अपडेट न कराना है। किसी भी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले, BLOs के लिए संबंधित पते पर कम से कम तीन बार जाना अनिवार्य है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को 17 अगस्त 2026 को पब्लिश किया जाएगा, और 17 अगस्त से 16 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद फाइनल इलेक्टोरल रोल 19 अक्टूबर 2026 को पब्लिश होगा।