दिल्ली वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में तेजी, 20 लाख मामलों का हुआ निपटारा

दिल्ली में वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 अब रफ्तार पकड़ रही है। चुनाव अधिकारियों ने अब तक करीब 20 लाख मामलों को सुलझा लिया है। दरअसल, कुल 33 लाख वोटर एंट्रीज में कुछ तकनीकी खामियां या विसंगतियां पाई गई थीं, जिनमें से 60% से ज्यादा मामलों का निपटारा कर लिया गया है। यह तेजी चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर नए विकल्प आने और दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के निर्देशों के बाद आई है, ताकि किसी भी पात्र वोटर का नाम गलती से न कट जाए।
वोटरों की सुविधा के लिए वेरिफिकेशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को यह अधिकार दिया गया है कि वे खुद मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें। इसका मतलब है कि अब लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने या व्यक्तिगत सुनवाई के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) अब BLO की वेरिफिकेशन रिपोर्ट और एक औपचारिक 'हियरिंग ऑर्डर' के आधार पर मामलों को फाइनल कर सकेंगे। अब जोर केवल इस बात पर है कि व्यक्ति भारत का नागरिक हो, उसकी उम्र सही हो और वह दिल्ली का निवासी हो।
राजनीतिक विवाद और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
जहां एक तरफ प्रशासनिक काम तेजी से चल रहा है, वहीं इस पूरी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 'फॉर्म 7' (नाम हटाने के आवेदन) की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। जुलाई से अगस्त के अंत तक जहां 51,471 आवेदन आए थे, वहीं अगस्त के अंत से अक्टूबर के बीच यह संख्या घटकर केवल 8,295 रह गई है।
इस बीच, राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन नोटिसों के यांत्रिक तरीके पर सवाल उठाए थे और इस याचिका पर सुनवाई की तैयारी कर रहा है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र वोटर को लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। आयोग ने EROs को निर्देश दिया है कि फॉर्म 7 के हर आवेदन पर व्यक्तिगत सुनवाई की जाए और थोक या डाक के जरिए भेजे गए आवेदनों को स्वीकार न किया जाए। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर है। उम्मीद है कि 30 नवंबर तक सभी मामलों का निपटारा हो जाएगा और 4 दिसंबर 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी।