दिल्ली वोटर लिस्ट सुधार: 'नो मैपिंग' नोटिस पाने वालों को चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत

दिल्ली के उन लाखों मतदाताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है, जिन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान 'नो मैपिंग' या 'लॉजिकल विसंगतियों' (Logical Discrepancy) के नोटिस मिले थे। चुनाव आयोग ने इन समस्याओं को सुलझाने की प्रक्रिया को अब पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे।
अब तक इन त्रुटियों को ठीक करने के लिए मतदाताओं को 12 निर्धारित दस्तावेजों की सूची तक ही सीमित रखा गया था। लेकिन अब अधिकारियों ने इस नियम में ढील दे दी है। चुनावी पंजीकरण अधिकारी (EROs) अब वैकल्पिक दस्तावेजों को भी स्वीकार कर सकेंगे। बस शर्त यह है कि अधिकारी प्रस्तुत किए गए सबूतों की वैधता से संतुष्ट होने चाहिए।
घर बैठे होगा दस्तावेजों का सत्यापन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), दिल्ली के कार्यालय की देखरेख में चल रही इस SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करना है। इस अभियान के तहत अब तक कुल 33.13 लाख नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से लगभग 26.5 लाख मामलों का समाधान किया जा चुका है। ये नोटिस मुख्य रूप से नाम, उम्र और पारिवारिक रिकॉर्ड में विसंगतियों या मैपिंग की समस्याओं के कारण भेजे गए थे।
आम जनता की सुविधा के लिए अब बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद घरों का दौरा करें और जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें। इससे मतदाताओं को अब बार-बार ERO के दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी कवायद का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम मतदाता सूची में किसी भी योग्य नागरिक का नाम न छूटे। बता दें कि अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली है।