दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन: लाखों कैंप लगे, लेकिन नए मतदाताओं का रुझान रहा कम

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष अभियान के बावजूद नए वोटर रजिस्ट्रेशन में उम्मीद से कम आवेदन मिले। जानें क्या हैं ताज़ा आंकड़े।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन: लाखों कैंप लगे, लेकिन नए मतदाताओं का रुझान रहा कम

राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चुनाव अधिकारियों ने जिस बड़े स्तर पर अभियान चलाया, उसके नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन के तहत शहर भर में करीब 1.49 लाख से ज्यादा विशेष कैंप लगाए गए, लेकिन इन कैंपों के जरिए नए मतदाताओं के पंजीकरण में काफी कम उत्साह देखा गया। आंकड़ों के मुताबिक, इन कैंपों से केवल 27,510 नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म 6) के आवेदन प्राप्त हुए हैं।

चुनाव अधिकारियों ने बताया कि ये विशेष कैंप दिल्ली के 14,947 अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किए गए थे, जिनमें पोलिंग स्टेशन, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज शामिल थे। इन कैंपों के माध्यम से कुल 38,849 आवेदन मिले, जिनमें से 10,729 आवेदन सुधार (फॉर्म 8) के लिए थे और 610 आवेदन नाम हटाने (फॉर्म 7) के लिए प्राप्त हुए।

वोटर लिस्ट में बड़ी कटौती और नए आवेदन

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इस पूरे विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया की बात करें तो 31 अगस्त से 26 अक्टूबर, 2026 के बीच कुल 2.67 लाख फॉर्म 6 आवेदन प्राप्त हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस संशोधन प्रक्रिया से पहले दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 1.45 करोड़ थी, लेकिन 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में यह घटकर 97.53 लाख रह गई। लगभग 47.5 लाख मतदाताओं को 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' (ASDD) श्रेणी में डालकर सूची से बाहर कर दिया गया है।

अभियान के दौरान समाज के वंचित वर्गों पर भी ध्यान दिया गया। बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और सेक्स वर्कर्स के लिए विशेष कैंप लगाए गए, जिनसे 557 आवेदन मिले, जिनमें से ज्यादातर नाम शामिल करने के लिए थे।

इस पूरी प्रक्रिया की समयसीमा अब तय हो चुकी है। दावों और आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2026 है, जबकि इन दावों का निपटारा 30 नवंबर तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जो नागरिक 1 अक्टूबर, 2026 तक 18 वर्ष के हो चुके हैं, वे अभी भी आवेदन करने के पात्र हैं।

वहीं, इस पूरी रिवीजन प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा हुई है, जहाँ चुनाव आयोग ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) के आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। हालांकि, कुछ आलोचकों ने उन मतदाताओं के लिए दोबारा फॉर्म 6 भरने की प्रक्रिया पर चिंता जताई है, जिनके नाम पहले सूची से हटा दिए गए थे।

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