दिल्ली वोटर लिस्ट अपडेट: 2.71 लाख नए आवेदन, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इतने नाम क्यों कटे?

दिल्ली में वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान 2.71 लाख नए आवेदन आए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नामों को हटाने पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली वोटर लिस्ट अपडेट: 2.71 लाख नए आवेदन, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इतने नाम क्यों कटे?

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपना नाम जुड़वाने के लिए आगे आए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, 31 अगस्त से 27 अक्टूबर 2026 के बीच नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 2,71,639 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह प्रक्रिया दिल्ली की मतदाता सूची को अपडेट और सटीक बनाने के लिए चलाई जा रही है।

सिर्फ नए आवेदन ही नहीं, बल्कि सूची में सुधार और बदलाव की भी होड़ रही। इसी अवधि के दौरान 1,02,149 लोगों ने विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरा, जबकि 20,654 लोगों ने नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है, जिसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और चुनाव आयोग का जवाब

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जहां एक तरफ आवेदनों की बाढ़ आई है, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि ड्राफ्ट रोल से करीब 47.57 लाख मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए? कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिन वोटरों के नाम सूची से गायब हो गए, उन्हें दोबारा फॉर्म-6 (नया रजिस्ट्रेशन) भरने को क्यों कहा जा रहा है, जबकि वे पहले से वोटर थे।

अदालत ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों ने केवल अपना पता बदला है, उन्हें फॉर्म-8 का विकल्प देना चाहिए और उन लोगों को राहत मिलनी चाहिए जो गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे। चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह इन सुझावों पर विचार करेगा और नाम जोड़ने के आवेदनों की समयसीमा बढ़ाने पर भी गौर करेगा। आयोग दो हफ्ते के भीतर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करेगा।

बता दें कि इस रिवीजन प्रक्रिया की शुरुआत 1.45 करोड़ वोटरों के बेस से हुई थी। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में 97,53,577 वोटर शामिल थे। करीब 47.56 लाख नाम मृत्यु, डुप्लीकेशन या पते में बदलाव जैसे कारणों से हटाए गए। अब तक जारी 33.14 लाख नोटिसों में से 94% यानी 31.26 लाख मामलों का निपटारा कर लिया गया है, जबकि बाकी बचे मामलों को 30 नवंबर 2026 तक सुलझाने का लक्ष्य है।

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