दिल्ली: पब्लिक ऑडिट में खुलासा, वोटर लिस्ट से गलत तरीके से कटे 100 से ज्यादा नाम

राजधानी दिल्ली के ओखला निर्वाचन क्षेत्र में वोटर लिस्ट की शुद्धता को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक पब्लिक ऑडिट में यह बात सामने आई है कि दो पोलिंग बूथों से 100 से अधिक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। इन मतदाताओं को 'अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लिकेट' (ASDD) की श्रेणी में डाल दिया गया, जबकि असलियत कुछ और थी।
यह ऑडिट सात दिनों तक चला, जिसमें करीब 258 घरों का सर्वे किया गया। इस प्रक्रिया में कई ऐसे लोग मिले जो दशकों से एक ही पते पर रह रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें 'अनट्रेसेबल' (पता नहीं चला) मार्क कर दिया गया। उदाहरण के तौर पर, 74 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर फैयाज अहमद जैसे बुजुर्ग निवासी अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं कि सालों तक एक ही घर में रहने के बावजूद उनका नाम लिस्ट से गायब कर दिया गया।
जन सुनवाई में गूंजी मतदाताओं की परेशानी
बटला हाउस इलाके में आयोजित एक जन सुनवाई के दौरान इन गड़बड़ियों को सबके सामने रखा गया। इस कार्यक्रम का आयोजन जन सरोकर, मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS), वोटर अधिकार मंच और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW) जैसे नागरिक संगठनों ने मिलकर किया था। इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट की वकील नयंतारा रॉय, सुमिता हजारिका और पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज व अमृता जोहरी शामिल थीं, जिन्होंने 150 से अधिक मतदाताओं की आपत्तियां सुनीं।
दूसरी ओर, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने 16 अक्टूबर को बताया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत चिन्हित 33 लाख विसंगतियों में से 24 लाख मामलों को सुलझा लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र मतदाता को लिस्ट से बाहर नहीं रखा जाएगा। चुनाव आयोग ने फील्ड अधिकारियों को घर-घर जाकर इन प्रविष्टियों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं और 20 सितंबर से विशेष वीकेंड कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
वर्तमान में, जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उन्हें फॉर्म 6 भरकर दोबारा पंजीकरण कराना होगा। इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी पेच फंसा हुआ था, लेकिन 18 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया कि प्रभावित मतदाता बिना किसी कानूनी डर के फॉर्म 6 का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं, इस मामले की समीक्षा कर रही है। कोर्ट ने 15 अक्टूबर को कहा था कि वह पुन: नामांकन फॉर्मों को लेकर भ्रम दूर करने के लिए राहत प्रदान करेगा, जिस पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होनी है।