दिल्ली वोटर लिस्ट 'लॉजिकल चेक' नोटिस: घबराएं नहीं, चुनाव आयोग ने जारी की गाइडलाइन

अगर आपको मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के तहत 'लॉजिकल चेक' नोटिस मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन नोटिसों का मकसद किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को सही और अपडेट करना है। चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।
दरअसल, चुनाव आयोग ने 2002 की मतदाता सूची के साथ तुलना करते हुए छह तरह की विसंगतियां पाई हैं। इनमें माता-पिता और बच्चों की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर, भाई-बहनों की उम्र में अंतर, पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग न होना और 'शिफ्टेड' वोटर स्टेटस जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसी जांच के दायरे में करीब 33 लाख मतदाता आए हैं, जिनमें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एल.के. आडवाणी जैसी बड़ी हस्तियां भी शामिल थीं। हालांकि, इनमें से अधिकांश का सत्यापन फील्ड चेक के जरिए पूरा हो चुका है।
कैसे सुधारें अपनी जानकारी और क्या है डेडलाइन?
जिन मतदाताओं के पास नोटिस पहुंचा है, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, रिश्तों का सबूत या 2002 की वोटर लिस्ट की कॉपी जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। आप ये दस्तावेज अपने स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), ERO या AERO को सौंप सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन के लिए voters.gov.in पोर्टल या ECI Net मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
समय सीमा की बात करें तो दावों और आपत्तियों को दर्ज करने की आखिरी तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। इन नोटिसों के समाधान की प्रक्रिया 30 नवंबर 2026 तक पूरी होगी, जिसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि नोटिसों में स्पष्टता रखी जाए और यह जांचा जाए कि कहीं ये नोटिस केवल मशीनी तरीके से तो नहीं भेजे जा रहे हैं। फिलहाल, BLO घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ऑनलाइन माध्यम को प्राथमिकता दी जा रही है।