दिल्ली वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी: राहुल गांधी ने इसे बताया 'वोट चोरी', सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

दिल्ली के त्रिलोकपुरी में पब्लिक हियरिंग के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने में बड़ी अनियमितताएं सामने आईं। राहुल गांधी ने इसे 'वोट चोरी' बताया।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी: राहुल गांधी ने इसे बताया 'वोट चोरी', सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में आयोजित एक पब्लिक हियरिंग के दौरान मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस सुनवाई में खुलासा हुआ कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जिसे विपक्ष ने लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करार दिया है।

मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS), जन सरोकार, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट विमेन (NFIW) और वोटर अधिकार मंच जैसे नागरिक समाज समूहों ने 23 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच एक डोर-टू-डोर ऑडिट किया था। इस ऑडिट के नतीजे चौंकाने वाले हैं। त्रिलोकपुरी के चार पोलिंग स्टेशनों पर कुल 1,236 नाम हटाए गए थे, जिनमें से 416 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए। इसका मतलब है कि हर तीन में से एक नाम गलत तरीके से लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

विपक्ष का हमला और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

इस पब्लिक हियरिंग में शामिल हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस पूरी प्रक्रिया को 'वोट चोरी' करार दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि इन चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मौके पर सीपीआई-एमएल के दीपांकर भट्टाचार्य और स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव भी मौजूद थे।

INDIA गठबंधन ने मांग की है कि वर्तमान SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त अपना इस्तीफा दें। गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया का सबसे बुरा असर गरीब मजदूरों, किरायेदारों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है। इसके विरोध में 30 अक्टूबर को एक प्रतीकात्मक महाभियोग जैसी कार्यवाही और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली करने का निर्णय लिया गया है।

इस बीच, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन 47 लाख मतदाताओं तक पहुंचने का रास्ता निकाले, जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि जो लोग पहले से पंजीकृत थे, उनसे 'फॉर्म 6' भरने को क्यों कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म आमतौर पर नए आवेदकों के लिए होता है।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह केवल डेटाबेस अपडेट करने की एक प्रक्रिया है। आयोग ने कोर्ट को बताया कि वह देरी से जमा होने वाले फॉर्मों को स्वीकार करने और 30 अक्टूबर की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।

Share:

Comments

Leave a comment