दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने से विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस प्रक्रिया की देखरेख कर रहे हैं, जिसके तहत चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बेला स्टेट बूथ पर मतदाताओं की संख्या 729 से घटकर केवल एक रह गई है, जो कि एक हनुमान मंदिर के महंत हैं। दिल्ली भर में कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47,56,722 नाम हटाए गए हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 32.9 प्रतिशत है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की राजनीतिक दलों के साथ बैठक का विवरण देखा जा सकता है।
लगभग 3.31 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें 13.8 लाख लोगों के लिए नो मैपिंग और 1.93 लाख लोगों के लिए तार्किक विसंगतियों के मुद्दे शामिल हैं। डेटाबेस में mismatches या रिकॉर्ड में असंगति के कारण जिन प्रमुख हस्तियों को नोटिस मिले हैं, उनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू, वरिष्ठ राजनेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के साथ-साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने कहा है कि इन नोटिसों का उद्देश्य तत्काल हटाने के बजाय रिकॉर्ड सुधार की अनुमति देना है। इस बारे में
एसआईआऱ के दौरान दस्तावेज से संबंधित नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।
21 सितंबर 2026 को राजनीतिक दलों के साथ बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि प्रक्रिया समावेशी बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट भी एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता को चुनौती देने वाली याचिका की समीक्षा कर रहा है। चिंताओं को दूर करने के लिए, 20 और 27 सितंबर को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर निर्धारित किए गए थे, जिसमें बेघर, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर आबादी के लिए 23 और 24 सितंबर को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के रैन बसेरों में अतिरिक्त सत्र आयोजित किए गए। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है, और अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।