दिल्ली में मौसम बदलते ही बढ़ा वायरल बुखार का प्रकोप, अस्पतालों में उमड़ी भीड़
मौसम बदलने और बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली के अस्पतालों में वायरल बुखार और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।

राजधानी दिल्ली में मौसम के मिजाज बदलते ही सेहत पर इसका सीधा असर दिखना शुरू हो गया है। शहर के अस्पतालों में इन दिनों दिल्ली में वायरल बुखार और सांस से जुड़ी तकलीफों के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा खांसी, जुकाम, गले में खराश और तेज बुखार की शिकायतें मिल रही हैं।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय चौहान ने बताया कि मौसम में हो रहे इस बदलाव की वजह से वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। उन्होंने आगाह किया कि इस मौसम में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (COPD) जैसी सांस की बीमारियां और ज्यादा गंभीर रूप ले लेती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चे और बुजुर्ग इस समय सबसे ज्यादा खतरे में हैं।
प्रदूषण और गिरता तापमान बढ़ा रहा है मुसीबत
बीमारियों के बढ़ने के पीछे सिर्फ मौसम ही नहीं, बल्कि दिल्ली की हवा भी जिम्मेदार है। 27 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 197 दर्ज किया गया, जिसे 'खराब' श्रेणी में रखा गया है। हवा की धीमी रफ्तार की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिससे फेफड़ों और दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है।
तापमान की बात करें तो सुबह और शाम काफी ठंडक महसूस होने लगी है। 27 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि 28 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री और न्यूनतम 15 से 17 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने पहले ही संकेत दिए थे कि मानसून के बाद इन्फ्लुएंजा का एक चक्र आता है, जिससे पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगस्त में ही दिल्ली-एनसीआर में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़े थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों वाले लोगों को एंटी-निमोनिया वैक्सीन लगवाने की सलाह दी थी।
हालात को देखते हुए दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन अलर्ट पर है। स्वास्थ्य मिशन के निदेशक की अध्यक्षता में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ रोजाना समीक्षा बैठकें की जा रही हैं, ताकि समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखा जा सके और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।