दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: 48 गांवों को मिला शहरी दर्जा, अब बदलेगी सूरत
दिल्ली सरकार ने 48 गांवों को ग्रामीण से शहरी श्रेणी में शामिल किया है, जिससे अब वहां बुनियादी ढांचे और प्लानिंग में सुधार होगा।

राजधानी दिल्ली के विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने अब शहर के 48 गांवों को ग्रामीण श्रेणी से हटाकर दिल्ली के 48 गांवों को शहरी दर्जा दे दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की। इस बदलाव का मुख्य मकसद इन इलाकों को दिल्ली के तेजी से बढ़ते शहरी ढांचे के साथ जोड़ना और वहां बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
यह पूरी प्रक्रिया दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507(A) के तहत पूरी की गई है। बता दें कि इस प्रस्ताव को फरवरी में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद नगर निगम (MCD) से भी इसे हरी झंडी मिल गई। अब ये सभी गांव ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2041/2047 के तहत व्यवस्थित शहरी नियोजन के दायरे में आएंगे।
बुनियादी सुविधाओं और प्लानिंग पर रहेगा जोर
गांवों को शहरी दर्जा मिलने के बाद अब वहां विकास कार्यों में एक नया तालमेल देखने को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई, सीवेज सिस्टम, सड़कों की कनेक्टिविटी और साफ-सफाई जैसी जरूरी सुविधाओं को बेहतर तरीके से मैनेज किया जाए। इसके अलावा, जमीन के इस्तेमाल (land-use) को लेकर भी अब स्पष्ट नियम होंगे।
आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद, अब इन गांवों में होने वाले किसी भी नए निर्माण या विकास कार्य के लिए शहरी बिल्डिंग रेगुलेशन और जोनिंग नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से निवासियों के जीवन स्तर में सुधार होगा और विकास व्यवस्थित तरीके से होगा।
गौरतलब है कि दिल्ली में कुल 357 गांव हैं, जिनमें से 309 गांवों को पहले ही शहरी घोषित किया जा चुका था। अब इन आखिरी 48 गांवों के शामिल होने के साथ ही पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की कोशिश यह है कि शहरीकरण के साथ-साथ इन गांवों की सांस्कृतिक विरासत और उनकी अपनी खास पहचान को भी बरकरार रखा जाए।