दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों का kalkaji gang rape case के बाद विरोध प्रदर्शन

दिल्ली यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने राजधानी में व्यापक प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाना और उनकी आवाजाही पर प्रतिबंधों को खत्म करना है। यह विरोध प्रदर्शन कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 23 सितंबर 2026 के आसपास एक 17 वर्षीय लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार के बाद तेज हुए हैं। भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों छात्रों ने 28 सितंबर को आर्ट्स फैकल्टी में इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सूर्यास्त के बाद पार्कों को बंद करने के सरकारी प्रस्तावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे उपाय यौन हिंसा का प्रभावी समाधान नहीं बल्कि नैतिक पुलिसिंग हैं। प्रदर्शनकारियों ने वास्तविक सुरक्षा सुधारों की मांग की है।
इन विरोध प्रदर्शनों के बाद कई आधिकारिक निकायों ने हस्तक्षेप किया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने सभी सार्वजनिक पार्कों के व्यापक सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया है। साथ ही महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा बीट गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस 5,000 से अधिक स्कूलों और 30 विश्वविद्यालयों में सुरक्षा ऑडिट कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में हालिया मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 5 अक्टूबर तक सार्वजनिक स्थानों पर ऑडिट रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुरक्षा चूकों को स्वीकार किया है और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकल्प लिया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित छात्र संगठनों ने ठोस उपायों की मांग की है। इन मांगों में बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और महिलाओं की सहायता के लिए पिंक बूथ शामिल हैं। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के भीतर आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) के सक्रिय संचालन की मांग भी की गई है। प्रदर्शनकारियों का रुख साफ है कि अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। महिलाओं को बिना किसी डर या कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों के सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।