QS रैंकिंग: दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप 100 से बाहर, IIT दिल्ली की रैंकिंग में भी गिरावट

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप 100 से बाहर हो गई है, वहीं IIT दिल्ली की रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
QS रैंकिंग: दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप 100 से बाहर, IIT दिल्ली की रैंकिंग में भी गिरावट

शिक्षा के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी रैंकिंग में इस बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) अब एशिया के टॉप 100 संस्थानों की सूची से बाहर हो गई है। 3 नवंबर 2026 को जारी 'QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग: एशिया 2027' के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी पिछले साल के 95वें स्थान से फिसलकर अब 106वें स्थान पर पहुंच गई है।

सिर्फ DU ही नहीं, बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक IIT दिल्ली की स्थिति में भी गिरावट देखी गई है। IIT दिल्ली की रैंकिंग 6 स्थानों नीचे गिरकर 59वें से 66वें स्थान पर आ गई है। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद IIT दिल्ली अभी भी भारत के सबसे ऊंचे रैंक वाले संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट के कारण

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हैरानी की बात यह है कि यह गिरावट केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। भारत के छह शीर्ष संस्थानों—IISc बेंगलुरु, IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT खड़गपुर और IIT कानपुर—सभी की रैंकिंग में कमी आई है। इस साल की रैंकिंग में एशिया के 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के 1,722 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 195 नए संस्थान शामिल हुए थे।

QS के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बेन सोटर ने इस गिरावट पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि रैंकिंग का नीचे गिरना अनिवार्य रूप से प्रदर्शन में कमी को नहीं दर्शाता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। भारत के लगभग 71% विश्वविद्यालयों की रैंकिंग गिरी है, लेकिन इनमें से कई संस्थानों के स्कोर वास्तव में सुधरे हैं, बस नए प्रतिस्पर्धियों के आने से उनकी पोजीशन नीचे खिसक गई है।

सकारात्मक पहलू यह है कि एशिया में उच्च शिक्षा प्रणालियों के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत अभी भी दूसरे स्थान पर है, जहाँ देश के 325 विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा, भारत एक रिसर्च हब के रूप में अपनी मजबूती बरकरार रखे हुए है। 'पेपर्स प्रति फैकल्टी' और डॉक्टरेट योग्य स्टाफ के मामले में भारत क्षेत्र में अग्रणी है, और रिसर्च आउटपुट के मामले में पांच भारतीय संस्थान एशिया के टॉप 10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

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