दिल्ली यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: 21 हजार से ज्यादा छात्रों के लिए 5,889 करोड़ से बनेंगे हॉस्टल

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: 21 हजार से ज्यादा छात्रों के लिए 5,889 करोड़ से बनेंगे हॉस्टल

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद (Executive Council) ने कैंपस में हॉस्टलों के विस्तार के लिए 5,889 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। इस बड़े कदम का मकसद करीब 21,895 छात्रों को सुरक्षित और आधुनिक आवास मुहैया कराना है।

यह फैसला कुलपति योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई 1284वीं कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान लिया गया। गौरतलब है कि कुलपति सिंह ने 8 अक्टूबर को अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था और यह उनके कार्यकाल का पहला बड़ा नीतिगत निर्णय है। इस प्रस्ताव को पहले 9 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी की वित्त समिति ने अपनी हरी झंडी दे दी थी।

हॉस्टलों का नया ढांचा और बजट का ब्यौरा

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

यूनिवर्सिटी ने इस पूरी परियोजना को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है। इसमें से 4,027 करोड़ रुपये नए हॉस्टलों के निर्माण के लिए रखे गए हैं, जिनमें 15,758 छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी। वहीं, बाकी के 1,862 करोड़ रुपये जुबली हॉल और पीजी मेन्स हॉस्टल के पुनर्निर्माण पर खर्च किए जाएंगे, जिससे 6,137 अतिरिक्त छात्रों को जगह मिलेगी। पुनर्निर्माण के बाद भी इन दोनों हॉस्टलों के नाम नहीं बदले जाएंगे।

यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि इन इमारतों का डिजाइन 21वीं सदी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि ये अगले 100 सालों तक टिकाऊ रहें। चूंकि कैंपस में जमीन की कमी है, इसलिए यूनिवर्सिटी अब वर्टिकल कंस्ट्रक्शन (ऊंची इमारतों) पर जोर दे रही है। जहां जगह उपलब्ध होगी, वहां 32 मंजिला ऊंची इमारतें बनाई जा सकती हैं।

इन कैंपस में बनेंगे नए हॉस्टल:

  • ढाका कॉम्प्लेक्स और सूरजमल विहार कैंपस
  • नजफगढ़ कैंपस और कड़कड़डूमा स्थित ईस्ट कैंपस
  • द्वारका स्थित वेस्ट कैंपस और रोशनपुरा के वीर सावरकर कॉलेज

इन नए हॉस्टल परिसरों में सिर्फ कमरे ही नहीं, बल्कि डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम, रीडिंग एरिया, दुकानें और वार्डन के लिए अलग आवास भी होंगे। बिल्डिंग कमेटी के प्रमुख प्रोफेसर बलराम पाणी ने बताया कि अब इस प्रस्ताव को अंतिम प्रशासनिक मंजूरी और फंड के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा।

बता दें कि यह फैसला तब आया है जब सितंबर में सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिरने से कई छात्रों की जान चली गई थी। इस हादसे ने छात्रों के रहने की असुरक्षित व्यवस्था और आवास की कमी को एक गंभीर मुद्दे के रूप में उभारा था। अब कार्यकारी परिषद ने संबद्ध कॉलेजों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने कैंपस में हॉस्टल विकास के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार कर जमा करें।

Share:

Comments

Leave a comment