दिल्ली विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी का मुद्दा इन दिनों बहुत चर्चा में है। 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में एक प्राइवेट पीजी (पेइंग गेस्ट) के ढहने से एक छात्र की मौत हो गई थी, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर छात्र आवास की सुरक्षा और कमी का मामला सबसे आगे आ गया है। इस घटना के बाद से प्रशासन और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। इस पूरी स्थिति को लेकर दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार नए कदम उठाने की बात कर रहे हैं ताकि छात्रों को सुरक्षित आवास मिल सके।
15 सितंबर 2026 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 10,000 छात्र-छात्राओं के लिए नए हॉस्टल बनाने की सरकारी पहल का ऐलान किया, जिसमें किफायती और सुरक्षित रहने की स्थिति पर जोर दिया गया। इससे पहले
10 सितंबर 2026 को डीयू ने अपनी कुल हॉस्टल क्षमता को बढ़ाकर 12,754 सीटें करने की योजना की घोषणा की थी। इसमें यूनिवर्सिटी स्तर की क्षमता को 3,422 से बढ़ाकर 7,344 सीटें करना और कॉलेज स्तर की क्षमता को 3,788 से बढ़ाकर 5,410 सीटें करना शामिल है।
डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कॉलेज के प्राचार्यों को मौजूदा सुविधाओं का मूल्यांकन करने और चल रहे निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है, साथ ही भविष्य की परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता का आकलन करने को भी कहा है।
इन योजनाओं के बावजूद,
15 सितंबर 2026 को The Indian Express की एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि संबंद्ध कॉलेजों के प्रशासकों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बाधाओं में मुख्य रूप से धन की कमी, जगह की कमी, भूमि उपयोग प्रतिबंध और संसाधनों की भारी कमी शामिल है।
ये सभी रुकावटें जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास को बेहद जटिल बना रही हैं, जिससे समय पर हॉस्टल का निर्माण पूरा होना मुश्किल हो रहा है।
हादसे के बाद नियामक और कानूनी दबाव काफी बढ़ गया है।
7 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को नोटिस जारी किया, जिसमें
15 अक्टूबर 2026 तक एक व्यापक और समयबद्ध कार्रवाई योजना पेश करने की मांग की गई है। NHRC ने इस विस्तार को आसान बनाने के लिए इन एजेंसियों से धन उपलब्ध कराने की सख्त जरूरत पर जोर दिया। इसके अलावा,
दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 सितंबर 2026 को इमारत की सुरक्षा को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उपलब्ध छात्र हॉस्टलों की मौजूदा संख्या को पूरी तरह से अपर्याप्त करार दिया है।