दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2026-27 के एकेडमिक सेशन के लिए 46 वन-इयर प्रोग्राम्स में 5,857 पोस्टग्रेजुएट यानी पीजी सीट्स официально शुरू कर दी हैं। यह जानकारी ANI (Source) द्वारा रिपोर्ट किए गए डेटा के अनुसार है। इस विस्तार से हर कोर्स में औसतन 120 से ज्यादा सीट्स मिल रही हैं, जिसमें रेगुलर मोड के जरिए 2,807 सीट्स शामिल हैं। इस पहल का मकसद अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के तहत फोर-इयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) पास करने वाले स्टूडेंट्स के पहले बैच को जगह देना है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस नए कदम से पीजी कोर्सेज में एडमिशन के अवसर काफी बढ़ गए हैं।
2026-27 एकेडमिक साल के लिए एडमिशन सिर्फ कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट – पोस्टग्रेजुएट 2026 यानी CUET (PG) – 2026 और अनिवार्य कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (PG) – 2026 यानी CSAS (PG) – 2026 के जरिए हो रहे हैं। इन वन-इयर प्रोग्राम्स के लिए रजिस्ट्रेशन दो फेज में हुए थे। पहला फेज 11 जुलाई 2026 को खत्म हुआ था, जबकि फेज 2 का रजिस्ट्रेशन 10 अगस्त 2026 तक खुला रहा था। सीट अलॉटमेंट 6 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था और पहले तथा दूसरे राउंड के लिए फीस जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त 2026 तय की गई थी।
सभी एडमिशन तय नियमों और पोर्टल के माध्यम से ही किए गए हैं।DU के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने कन्फर्म किया है कि यूनिवर्सिटी ने नए इनटेक को सपोर्ट करने के लिए क्लासरूम की क्षमता और फैकल्टी रिसोर्सेज को बढ़ाया है। इन उपायों में और टीचर्स को हायर करना, पढ़ाने के लिए ज्यादा जगह देना और कॉलेज फैकल्टी को ऑनररियम देना शामिल है जो यूनिवर्सिटी की पढ़ाई में योगदान देंगे। एडमिशन की डीन प्रो. हनीत गांधी ने कन्फर्म किया कि सिलेक्शन प्रोसेस पूरी तरह मेरिट-बेस्ड है और यूनिवर्सिटी नए करिकुलम की जरूरतों को मैनेज करने के लिए कॉलेजों के साथ तालमेल बिठा रही है। हालांकि यूनिवर्सिटी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत इन बदलावों को आगे बढ़ाया है, लेकिन कुछ फैकल्टी मेंबर्स ने बढ़े हुए स्टूडेंट्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और करिकुलम डिजाइन को लेकर चिंता जताई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन और टीचर्स के बीच इन सभी मुद्दों पर बातचीत जारी है।