दिल्ली की यूनिवर्सिटीज में बढ़ा तनाव: JNU, जामिया और AUD में छात्रों की भूख हड़ताल

Kittu Kumari19 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की यूनिवर्सिटीज में बढ़ा तनाव: JNU, जामिया और AUD में छात्रों की भूख हड़ताल

राजधानी दिल्ली के उच्च शिक्षा संस्थानों में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। शहर की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज में छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू (JNU), जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और अंबेडकर यूनिवर्सिटी (AUD) जैसे कैंपस इस समय शैक्षणिक अशांति और प्रशासनिक टकराव के केंद्र बने हुए हैं।

कैंपसों में मांगों का अंबार और प्रशासन की सख्ती

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में स्थिति काफी गंभीर है, जहां 3 अक्टूबर से शुरू हुई भूख हड़ताल अब अपने 16वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। JNUSU के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय के मैनुअल को वापस लेने, बुनियादी ढांचे में सुधार और भर्ती अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, छात्र CUET के बजाय यूनिवर्सिटी की अपनी प्रवेश परीक्षा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। जहां प्रशासन का दावा है कि छात्रों के स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है, वहीं छात्र संघ का आरोप है कि निष्कासित पदाधिकारियों को शुरुआती दिनों में मेडिकल सहायता नहीं दी गई। प्रशासन ने इन छात्रों पर सार्वजनिक संपत्ति को 20 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया है।

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वहीं, जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में 12 अक्टूबर से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग 2006 के बाद से बंद पड़े छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू करना है। 17 अक्टूबर को छात्रों को जबरन कैंपस से हटाने की खबरों के बाद तनाव और बढ़ गया। हालांकि, कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ ने स्थिति को सामान्य करने के लिए एक सात सदस्यीय समिति बनाई है, लेकिन साथ ही एनएसयूआई (NSUI) के महासचिव सहित कुछ छात्रों पर निलंबन और कैंपस प्रतिबंध की कार्रवाई भी की है।

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) में भी 28 सितंबर से सिट-इन विरोध प्रदर्शन चल रहा है। यहां 13 अक्टूबर को एक डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद 11 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। AISA ने इन कार्रवाइयों को मनमाना बताया है। छात्रों की मांगें कैंपस एक्सेस, फैकल्टी भर्ती और पीएचडी फीस माफी को फिर से लागू करने से जुड़ी हैं।

इन आंतरिक विवादों के अलावा, दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। दूसरी ओर, दुनिया भर के 27 देशों से भारतीय मूल के 400 से अधिक छात्रों और पूर्व छात्रों ने इन प्रदर्शनों को 'अराजक' बताते हुए इन्हें संस्थागत संवाद के जरिए सुलझाने की अपील की है।

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