दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के लिए 65 करोड़ का DRISHTI प्रोजेक्ट मंजूर, अब आसान होगा मालिकाना हक

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने शहर की इन बस्तियों के सर्वे और मैपिंग के लिए 65 करोड़ रुपये के दिल्ली अनधिकृत कॉलोनी सर्वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस खास पहल को 'DRISHTI' (Delhi Revenue and Imaging Survey, Spatial Technology Initiative) नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य पीएम-उदय (PM-UDAY) योजना की रफ्तार को बढ़ाना और लोगों को उनकी प्रॉपर्टी के कानूनी अधिकार दिलाना है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए दिल्ली की 1,500 से ज्यादा अनधिकृत कॉलोनियों का जीआईएस (GIS) आधारित सर्वे किया जाएगा। इससे न केवल संपत्तियों की सीमाओं का सटीक निर्धारण होगा, बल्कि मैपिंग के जरिए कागजी कार्रवाई में पारदर्शिता भी आएगी। इस पूरी योजना के तहत केंद्र का आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय कुल लागत का 80 प्रतिशत यानी 52 करोड़ रुपये देगा, जबकि बाकी के 13 करोड़ रुपये दिल्ली राजस्व विभाग द्वारा वहन किए जाएंगे।
कैसे काम करेगा DRISHTI सिस्टम और कहां मिलेगी मदद?
प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए दिल्ली के सभी 13 जिलों और राजस्व विभाग के मुख्यालय में विशेष 'पीएम-उदय सेल' बनाए जाएंगे। ये सेल दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम (MCD) के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
इस सिस्टम की खास बातें नीचे दी गई हैं:
- जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी: संपत्तियों की सीमाओं और कोऑर्डिनेट्स को वेरिफाई करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- फंडिंग मॉडल: 52 करोड़ की केंद्रीय ग्रांट या तो चार किस्तों में मिलेगी या फिर GeM पोर्टल के जरिए खरीदारी होने पर एक साथ दी जाएगी।
- नियमों का पालन: यह पूरा सर्वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी जियोस्पेशियल डेटा गाइडलाइन्स के तहत किया जाएगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस कदम से उन हजारों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी जो लंबे समय से अपने घर के मालिकाना हक के इंतजार में थे। अब आधुनिक तकनीक की मदद से प्रॉपर्टी का दस्तावेजीकरण अधिक व्यवस्थित और त्रुटिहीन तरीके से हो सकेगा।