दिल्ली में जलभराव से मिलेगी राहत, सरकार ने ₹263.45 करोड़ के ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट को दी मंजूरी

राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान सड़कों पर जमा होने वाले पानी और जलभराव की पुरानी समस्या से अब निजात मिल सकती है। दिल्ली सरकार ने शहर के चार प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों—किरारी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट में जलभराव को रोकने के लिए एक बड़े ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹263.45 करोड़ का संशोधित बजट आवंटित किया गया है, जिसका लक्ष्य शहर के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाना है।
इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे लाइन के समानांतर 4.5 किलोमीटर लंबा एक नया ट्रंक ड्रेन बनाया जाएगा। इस ड्रेन की क्षमता 760 क्यूसेक होगी, जिससे बारिश के अतिरिक्त पानी को आसानी से मोड़ा जा सकेगा। इससे मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क पर दबाव कम होगा और रिहायशी इलाकों में पानी जमा होने की समस्या खत्म होगी। निर्माण कार्य को सुगम बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने भारतीय रेलवे के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
पुराने मास्टर प्लान को अपडेट कर बुनियादी ढांचे में सुधार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रशासन अब ड्रेनेज के चार बड़े अपग्रेड्स पर तेजी से काम कर रहा है। इनमें मुंडका सप्लीमेंट्री ड्रेन, एमबी रोड स्टॉर्म वाटर ड्रेन, किरारी-रिठाला ट्रंक ड्रेन और रोहतक रोड ड्रेन शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली का पुराना ड्रेनेज मास्टर प्लान 1970 के दशक का था, जिसे बढ़ती आबादी और शहरी घनत्व के हिसाब से अपडेट नहीं किया गया था। अब नए संशोधित मास्टर प्लान के जरिए दिल्ली की भौगोलिक चुनौतियों और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बदलाव किए जा रहे हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण (I&FC) विभाग को सौंपी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2027 तक इस काम को पूरा कर लिया जाए, ताकि राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को जलभराव की समस्या से स्थाई रूप से राहत मिल सके।