2016 ट्रिपल मर्डर केस: सबूतों की कमी से आरोपी बरी, मुख्य मुजरिम अब भी फरार

दिल्ली की एक अदालत ने साल 2016 के एक दिल दहला देने वाले ट्रिपल मर्डर केस में एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। यह मामला दो महिलाओं और एक बच्ची की गला रेतकर हत्या से जुड़ा है। हालांकि, इस खौफनाक वारदात का मुख्य आरोपी साल 2022 से ही फरार चल रहा है, जिससे पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) बलविंदर सिंह ने आरोपी जावेद को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले में गंभीर संदेह है और यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ने इस अपराध या साजिश में कोई भूमिका निभाई थी। जावेद पर आईपीसी की धारा 120B, 302 और 201 के तहत मामला दर्ज था, लेकिन कोर्ट ने उसे इन सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
पैसे की मांग और धोखे की थी यह खौफनाक कहानी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस पूरी वारदात के पीछे राहीउद्दीन उर्फ हैदर नाम का शख्स था। आरोप था कि मेहरून निशा और उसकी मां सायरा ने हैदर से 1 लाख रुपये की मांग की थी। जब हैदर पैसे नहीं जुटा पाया, तो मेहरून और उसकी मां ने उसे झूठे रेप केस में फंसाने की धमकी दी। इसके अलावा, हैदर इस बात से भी नाराज था कि मेहरून अब उससे बात नहीं करती थी और अन्य पुरुषों से दोस्ती कर रही थी।
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, हैदर और जावेद ने मिलकर इन तीनों की हत्या की साजिश रची। आरोप था कि जावेद ने मेहरून को यह कहकर घर से बाहर बुलाया कि हैदर पैसे का इंतजाम कर चुका है। इसी बीच हैदर घर में घुसा और मीट काटने वाले चाकू से सायरा और शबनम की हत्या कर दी। वह घर के अंदर बैठकर टीवी देख रहा था और जैसे ही जावेद ने फोन कर मेहरून के आने की खबर दी, हैदर ने उसका भी गला रेत दिया।
हैदर को जून 2016 में ब्रह्मपुरी इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जहां उसने अपना जुर्म कबूल किया था। वहीं, जावेद पर आरोप था कि उसने निगरानी रखी और सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन नष्ट किया, लेकिन अदालत ने पाया कि इस दावे को साबित करने के लिए कोई भी वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष प्रमाण रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं था।