दिल्ली में 153 एक्सीडेंट प्रोन जोन की पहचान, 492 पैदल यात्रियों की मौत से मचा हड़कंप

राजधानी की सड़कों पर पैदल चलना अब और भी जोखिम भरा हो गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शहर में दिल्ली एक्सीडेंट प्रोन जोन की पहचान की है, ताकि सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर लगाम लगाई जा सके। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले नौ महीनों में ही 492 पैदल यात्रियों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
ट्रैफिक पुलिस ने पूरे शहर में 153 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है जहां हादसों का खतरा सबसे ज्यादा है। इन हाई-रिस्क जोन में मुख्य सड़कें, चौराहे, फ्लाईओवर, बस टर्मिनल और मेट्रो स्टेशनों के आसपास के इलाके शामिल हैं। सबसे खतरनाक रास्तों में बाहरी रिंग रोड, रिंग रोड, जीटी रोड, यूईआर-2, रोहतक रोड, वजीराबाद रोड, नजफगढ़ रोड, एनएच-9, मथुरा रोड और एनएच-8 जैसे व्यस्त मार्ग शामिल हैं।
हादसों की बड़ी वजह और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन मौतों के पीछे मुख्य कारण फुटपाथ, फुट ओवरब्रिज और अंडरपास जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इसके साथ ही पैदल चलने वालों की लापरवाही को भी एक बड़ा कारण माना गया है। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए पुलिस ने कई कदम उठाए हैं:
- पार्किंग पर सख्ती: त्योहारी सीजन में भीड़ को नियंत्रित करने और पैदल चलने वालों के लिए रास्ता साफ करने के लिए गलत पार्किंग के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें पिछले एक हफ्ते में 8,351 चालान काटे गए।
- लोक अदालत: ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए 25 अक्टूबर 2026 को लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। 30 जून 2026 तक के लंबित चालानों के लिए 19 अक्टूबर से स्लिप डाउनलोड करने की सुविधा शुरू कर दी गई है।
- फ्लाईओवर बंद: सुरक्षा कारणों से पुराने राव तुला राम (RTR) फ्लाईओवर (IGI एयरपोर्ट से वसंत विहार की ओर) के दो हिस्सों में दरारें मिलने के बाद इसे 25 अक्टूबर 2026 तक बंद रखा गया है, ट्रैफिक को सर्विस रोड पर डायवर्ट किया गया है।
इन उपायों के जरिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का लक्ष्य न केवल ट्रैफिक जाम को कम करना है, बल्कि उन 153 ब्लैक स्पॉट्स पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करना है जहां हर दिन मासूम जानों का खतरा बना रहता है।