UPI ट्रांजेक्शन पर लगेगा शुल्क? दिल्ली के सदर बाजार में व्यापारियों ने किया जोरदार प्रदर्शन

दिल्ली के सबसे बड़े थोक बाजारों में से एक, सदर बाजार में सोमवार को माहौल काफी गरमाया रहा। यहां के व्यापारियों ने 2000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड एसोसिएशन के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में व्यापारियों ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि यह अतिरिक्त शुल्क छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने किया। गौरतलब है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि व्यापारियों को इसे वहन करना होगा, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
क्या है पूरा विवाद और सरकार का रुख?
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस सिस्टम में 2000 रुपये से ऊपर के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
दूसरी ओर, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस कदम को डिजिटल इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी बताया है। उनका तर्क है कि लगभग 96% ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से कम के होते हैं, इसलिए अधिकांश छोटे लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे UPI के इस्तेमाल में कमी नहीं आएगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस शुल्क से मिलने वाला पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा, बल्कि इसे बैंकों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बांटा जाएगा।
व्यापारियों के बढ़ते दबाव और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए, NPCI की स्टीयरिंग कमेटी अब इस फैसले को 1 जनवरी 2027 तक टालने पर विचार कर रही है। साथ ही, उन व्यवसायों को छूट देने पर भी चर्चा चल रही है जिनका वार्षिक टर्नओवर 40 लाख रुपये तक है।
इस बीच, कुछ विशेष श्रेणियों जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन के लिए 2000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट शुल्क तय किया गया है, जबकि म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन पर 0.02% MDR (अधिकतम 300 रुपये) लागू होगा। इससे पहले ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन और अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं।