प्रदर्शनों से करोड़ों का नुकसान, दिल्ली के व्यापारियों की गुहार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

राजधानी दिल्ली के बाजारों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और रास्तों की बंदी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। त्योहारों और शादियों के इस पीक सीजन में जब कारोबार चरम पर होना चाहिए, तब सड़क जाम और बैरिकेडिंग की वजह से दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर दिल्ली किराना कमेटी, खान मार्केट एसोसिएशन और लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन समेत कई व्यापारिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर अब देश की शीर्ष अदालत ने सुनवाई शुरू कर दी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने माना कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्टॉल चलाने वालों के लिए यह समय साल का सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी की कमाई से उनके परिवारों का गुजारा चलता है। व्यापारियों का दावा है कि कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में प्रदर्शनों के कारण रोजाना करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का व्यापारिक नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां एक तरफ विरोध जताने का अधिकार है, वहीं दूसरी तरफ काम करने का अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
व्यापारियों की मांग और प्रशासन की कार्रवाई
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को बैरिकेडिंग का इस्तेमाल केवल तभी करना चाहिए जब वह बेहद जरूरी हो, ताकि आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित न हो। मामले में यह बात भी सामने आई कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित तिरंगा मार्च के बाद NDMC ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद कर दिया था, जिसके बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
व्यापारियों ने कोर्ट से मांग की है कि प्रदर्शनों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जाए और विरोध स्थलों को मुख्य व्यावसायिक केंद्रों से दूर स्थानांतरित किया जाए। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने तो प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल तक को पत्र लिखकर जनवरी 2027 तक राजनीतिक प्रदर्शनों को स्थगित करने की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन इस मामले की अगली सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर 2026 को तय की है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि प्रशासनिक पाबंदियां जरूरत से ज्यादा पाई गईं और उससे अवैध व्यापारिक नुकसान हुआ, तो वह संवैधानिक प्रावधानों के तहत हस्तक्षेप करेगा। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।