जंतर मंतर पर प्रदर्शन की आहट से सहमे दिल्ली के व्यापारी, त्योहारों पर बिजनेस चौपट होने का डर

सेंट्रल दिल्ली के व्यापारियों के लिए यह समय खुशियों के बजाय चिंता लेकर आया है। जंतर मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में डर का माहौल है, जिससे त्योहारों और शादियों के सीजन की शुरुआत में ही भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। 10 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की योजना है, जिसने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है।
इस स्थिति को देखते हुए न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने एहतियात के तौर पर कनॉट प्लेस के दुकानदारों, रेस्टोरेंट मालिकों और ऑफिस संचालकों को 10 अक्टूबर को दुकानें बंद रखने की सलाह दी है। NDTA के अध्यक्ष अतुल भार्गवा ने साफ किया कि वे प्रशासन से मांग करेंगे कि जंतर मंतर जैसे कमर्शियल हब से विरोध प्रदर्शनों को हटाकर कहीं और शिफ्ट किया जाए। इसी तरह, दिल्ली व्यापार महासंघ के देवराज बावेजा ने शनिवार को सदर बाजार में भी शटडाउन की घोषणा की है।
व्यापार में 70% की गिरावट, करोड़ों का जोखिम
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में दिल्ली की व्यावसायिक गतिविधियों में करीब 70% की गिरावट आई है। इस अस्थिरता का असर लगभग 15 लाख व्यापारियों पर पड़ रहा है। सीटीआई के महासचिव गुरमीत अरोड़ा ने बताया कि दिल्ली से बाहर से आने वाले ग्राहकों की संख्या 2-3 लाख से घटकर महज 40 से 50 हजार रह गई है, जबकि स्थानीय ग्राहकों की संख्या में भी 50% से ज्यादा की कमी आई है।
व्यापारियों की चिंताएं केवल ग्राहकों की कमी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों के टर्नओवर का सवाल है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने चेतावनी दी है कि अगर यह व्यवधान जारी रहा, तो रोजाना 500-600 करोड़ रुपये के कारोबार में से करीब 250 करोड़ रुपये जोखिम में पड़ सकते हैं।
व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि दिवाली तक संसद मार्ग और लुटियंस दिल्ली जैसे इलाकों में बड़े प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए। उनका सुझाव है कि 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ वाले प्रदर्शनों को बुराड़ी या रामलीला मैदान जैसे निर्धारित स्थलों पर शिफ्ट किया जाए।
हालांकि, चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के संजय भार्गवा का कहना है कि उन्हें दिल्ली पुलिस से बाजार बंद करने का कोई औपचारिक सर्कुलर नहीं मिला है, लेकिन 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली नवरात्रि के ठीक पहले बिक्री घटने की चिंता उन्हें भी सता रही है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के हेमंत गुप्ता ने भी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे रिटेल सेक्टर को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदर्शनों से बचें। व्यापारियों का मानना है कि ट्रैफिक जाम और मेट्रो स्टेशनों का बार-बार बंद होना उनके बिजनेस को पूरी तरह तबाह कर रहा है, जिसका असर जनवरी 2027 तक महसूस किया जा सकता है।