INDIA गठबंधन की रैली से दिल्ली व्यापारियों को भारी चोट, 12 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान
रामलीला मैदान में हुई 'चलो दिल्ली' रैली के कारण दिल्ली के व्यापारियों को 12,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है।

राजधानी दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन द्वारा आयोजित 'चलो दिल्ली' रैली अब व्यापारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका बन गई है। रामलीला मैदान में हुई इस रैली के कारण त्योहारों के सीजन में व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, इस एक दिन के व्यवधान से शहर के व्यापारियों को करीब 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित मतदाता सूची अनियमितताओं के विरोध में निकाली गई थी। लेकिन इस राजनीतिक हलचल का असर दिल्ली के बाजारों पर गहराई से पड़ा। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि आयोजन स्थल के 5 किलोमीटर के दायरे में करीब 80% दुकानें बंद रहीं। चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली और करोल बाग जैसे प्रमुख थोक और रिटेल बाजारों में व्यापार पूरी तरह ठप हो गया।
रसद व्यवस्था ठप और ग्राहकों की कमी से बढ़ी परेशानी
व्यापारियों का दावा है कि रैली के कारण न केवल दुकानें बंद रहीं, बल्कि सामान की आवाजाही भी पूरी तरह बाधित रही। आयोजन स्थल के 10 किलोमीटर के दायरे में करीब 5,000 ट्रकों और टेम्पों की लोडिंग-अनलोडिंग बंद करनी पड़ी। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से लगाए गए बैरिकेड्स और ट्रैफिक पाबंदियों की वजह से पड़ोसी इलाकों से आने वाले 3 से 4 लाख ग्राहकों की दैनिक भीड़ में भारी गिरावट आई।
हालांकि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश के जरिए रैली में आए लोगों से स्थानीय व्यवसायों का समर्थन करने की अपील की थी, लेकिन CTI का कहना है कि जमीनी हालात ऐसे थे कि व्यापार करना नामुमकिन था। संगठन ने पहले ही राहुल गांधी और सोनिया गांधी से इस कार्यक्रम को 10 नवंबर के बाद करने या इसे बुराड़ी मैदान में शिफ्ट करने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई।
इस रैली में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए थे। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं ने इस रैली के समय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को आर्थिक परेशानी में डालकर इस रैली का आयोजन किया गया, साथ ही उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन इस आयोजन को लेकर भी आपत्ति जताई।