दिवाली पर प्रदर्शनों का साया: दिल्ली व्यापारियों को 10,000 करोड़ के नुकसान का डर
दिवाली के सीजन में विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। CAIT ने रैली स्थगित करने की मांग की है।

दिवाली का त्योहार खुशियां और समृद्धि लेकर आता है, लेकिन दिल्ली के व्यापारियों के लिए यह सीजन चिंता का कारण बन गया है। शहर में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का अनुमान है कि अगर 25 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच नियोजित प्रदर्शन जारी रहे, तो उन्हें करीब 10,000 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) जैसे संगठनों ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप की अपील की है। व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली को लेकर है। ट्रेड संगठनों का कहना है कि त्योहारों के इस पीक सीजन में ऐसी बड़ी रैलियों से बाजार ठप हो जाते हैं, जिससे न केवल बड़े व्यापारियों बल्कि दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ता है।
रैलियों से बाजार में मची खलबली
व्यापारियों ने अपनी मांग रखी है कि 1 नवंबर के कार्यक्रम को कम से कम 10 नवंबर (भाई दूज) के बाद तक स्थगित कर दिया जाए, ताकि दिवाली की खरीदारी निर्बाध रूप से चल सके। आंकड़ों की बात करें तो अक्टूबर महीने में ही अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इसमें 10 अक्टूबर के आसपास हुई इंडिया ब्लॉक की रैली से हुआ 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान भी शामिल है, जिसने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है।
CAIT ने सरकार और उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि शहर के बाहरी इलाकों में विरोध प्रदर्शन के लिए स्थायी स्थल बनाए जाएं। इससे लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बना रहेगा। दूसरी ओर, 1984 के दंगों के पीड़ितों के परिवारों और सिख समुदाय ने भी गृह मंत्री अमित शाह से इस रैली की अनुमति न देने की अपील की है।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं, जिनमें अलका लंबा शामिल हैं, का कहना है कि रैली तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। इस बीच, व्यापारियों की घबराहट इतनी बढ़ गई है कि CAIT ने 26 अक्टूबर को ट्रेड लीडर्स की एक इमरजेंसी ऑनलाइन बैठक बुलाई है, ताकि इस संकट से निपटने के लिए आगे की रणनीति तय की जा सके।