दिल्ली के व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शनों पर रोक और मुआवजे की मांग

देश की राजधानी दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने हालिया विरोध प्रदर्शनों के कारण हुए भारी आर्थिक नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन (APMA) और सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन (SMSA) जैसे बड़े संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। व्यापारियों का दावा है कि 10 अक्टूबर के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों और उनके आह्वान से बाजारों में डर का माहौल बन गया, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
व्यापारियों के अनुसार, 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के कारण बाजार में ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई। प्रदर्शन की तारीख से 4-5 दिन पहले और बाद तक लोग बाजारों में आने से कतराते रहे। व्यापारियों ने अनुमान लगाया है कि इस व्यवधान की वजह से लगभग 2,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का समय उनके लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, क्योंकि नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान ही उनकी साल भर की मुख्य कमाई होती है।
त्योहारी सीजन में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की अपील
व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार और न्यायपालिका से मांग की है कि दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में सभी प्रकार के विरोध प्रदर्शनों और मार्च पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकानें न केवल उनके परिवार, बल्कि कर्मचारियों के वेतन, बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा का आधार हैं। यदि त्योहारों के इस महत्वपूर्ण समय में राजधानी को विरोध प्रदर्शनों का अखाड़ा बनाया गया, तो छोटे और मध्यम वर्ग के दुकानदार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
व्यापारियों ने अपनी मांगों में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
- नुकसान की भरपाई: 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से हुए नुकसान का पारदर्शी आकलन किया जाए और इसकी पूरी भरपाई प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों और प्रदर्शनकारियों से कराई जाए।
- जवाबदेही तय करना: व्यापारियों का आरोप है कि कुछ हाई-प्रोफाइल हस्तियां और पेशेवर कार्यकर्ता प्रदर्शनों का आह्वान करते हैं, जिससे आम दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है। उन्होंने कानून के तहत आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
- सुरक्षा जोखिम: संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों में बिना सूचना के होने वाली रैलियों से सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। इन प्रदर्शनों में एम्बुलेंस या फायर टेंडर जैसे आपातकालीन इंतजाम नहीं होते, जिससे ग्राहकों और कर्मचारियों की जान को खतरा रहता है।
इन व्यापारिक संगठनों ने अनुरोध किया है कि आगामी पूरे त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली में किसी भी विरोध प्रदर्शन या मार्च की अनुमति न दी जाए, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।