दिल्ली में रैलियों से 14 हजार करोड़ का नुकसान, व्यापारियों ने दी दुकानें सौंपने की चेतावनी
दिल्ली के व्यापारियों ने रैलियों के कारण 14,000 करोड़ के नुकसान का दावा किया है और पुलिस को दुकानें सौंपने की चेतावनी दी है।

त्योहारी सीजन में व्यापार की उम्मीद लगाए बैठे दिल्ली के व्यापारियों का सब्र अब जवाब दे गया है। शहर में लगातार होने वाले प्रदर्शनों और रैलियों की वजह से कारोबार पर इतना बुरा असर पड़ा है कि अब व्यापारियों ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर रैलियों के कारण व्यापार में बाधा आना जारी रहा, तो व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां रैली आयोजकों को सौंप देंगे।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लिखे एक पत्र में बताया कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच व्यापारिक समुदाय को करीब 14,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। इसमें सबसे बड़ा झटका 1 नवंबर को रामलीला मैदान में हुई मेगा रैली से लगा, जिसकी वजह से लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं और अकेले इस एक दिन में 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
प्रदर्शनों की मार और व्यापारिक संकट
व्यापारियों का कहना है कि केवल एक बड़ी रैली ही नहीं, बल्कि अक्टूबर महीने भर जंतर मंतर, कनॉट प्लेस और जनपथ जैसे प्रमुख इलाकों में हुए लगातार प्रदर्शनों ने भी कमर तोड़ दी है। इन प्रदर्शनों की वजह से करीब 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ है। इस आर्थिक चोट का असर सिर्फ रिटेल दुकानों पर ही नहीं, बल्कि होटलों, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट व लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी पड़ा है।
आने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों जैसे धनतेरस, दिवाली और भाई दूज को ध्यान में रखते हुए CTI ने दिल्ली पुलिस से एक विशेष मांग की है। व्यापारियों ने आग्रह किया है कि 11 नवंबर तक कनॉट प्लेस, जंतर मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, राजघाट और दिल्ली गेट जैसे मुख्य केंद्रों पर सभी रैलियों, धरनों और विरोध मार्च पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
व्यापारिक संगठन ने सुझाव दिया है कि राजनीतिक सभाओं को शहर के बाहरी इलाकों जैसे बुरारी, अलीपुर, जसोला और यमुना खादर में आयोजित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, दिवाली के मद्देनजर मध्य दिल्ली में ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की मांग की गई है ताकि ग्राहकों को आने-जाने में परेशानी न हो और व्यापार सुचारू रूप से चल सके।