दिल्ली के व्यापारियों की पीएम मोदी से अपील: 2027 तक रुकें राजनीतिक विरोध प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में बार-बार होने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से परेशान व्यापारिक संगठनों ने अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली के विभिन्न व्यापारिक संघों ने एक औपचारिक याचिका के जरिए मांग की है कि 31 जनवरी 2027 तक शहर में सभी राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए। व्यापारियों का कहना है कि इन प्रदर्शनों की वजह से न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि व्यापार और रोजगार पर भी इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
यह अपील केवल प्रधानमंत्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भी पत्र लिखे हैं। इस मुहिम में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (BUVM), लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन और दिल्ली किराना कमेटी जैसे कई बड़े संगठन शामिल हैं।
करोड़ों का नुकसान और सड़कों पर लगा पहरा
व्यापारियों ने अपने दर्द को आंकड़ों के जरिए बयां किया है। उनका दावा है कि पिछले कुछ दिनों के प्रदर्शनों के कारण व्यापार में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिससे रोजाना करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, 10 अक्टूबर के आसपास हुए एक प्रदर्शन की वजह से ग्राहकों की संख्या इतनी कम हो गई कि व्यापारियों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा।
खान मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने बताया कि सड़कों पर लगातार लगाए जाने वाले बैरिकेड्स ने व्यापार का दम घोंट दिया है। सबसे ज्यादा चिंता सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि जाम और बैरिकेडिंग की वजह से आपातकालीन सेवाएं जैसे एम्बुलेंस और फायर टेंडर समय पर बाजारों तक नहीं पहुंच पाते।
इस मामले को लेकर दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस पर सुनवाई की। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल कोई तत्काल अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन यह माना है कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।
व्यापारियों का सुझाव है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए शहर के बीचों-बीच के इलाकों के बजाय बाहरी दिल्ली के निर्धारित 'प्रोटेस्ट जोन' जैसे बुराड़ी या रामलीला मैदान का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने मांग की है कि किसी भी प्रदर्शन की अनुमति देने से पहले स्थानीय मार्केट एसोसिएशन से सलाह ली जानी चाहिए। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आजीविका और जनहित की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है।