त्योहारी सीजन में बाजारों में प्रदर्शन पर रोक की मांग, दिल्ली व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने त्योहारों के सीजन के दौरान व्यावसायिक केंद्रों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और मार्च पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। व्यापारियों ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार और न्यायपालिका से औपचारिक अपील की है। फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन (APMA) और सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन (SMSA) जैसे समूहों ने चेतावनी दी है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच चलने वाले नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे महत्वपूर्ण समय पर इन प्रदर्शनों से उनके व्यापार पर गहरा असर पड़ता है।
व्यापारियों का दावा है कि हालिया प्रदर्शनों, विशेष रूप से 10 अक्टूबर 2026 को हुई घटनाओं के कारण उन्हें करीब 2,000 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। बाजारों में डर का माहौल होने की वजह से ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। खान मार्केट एसोसिएशन के मुताबिक, वहां रोजाना लगभग 50 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
नुकसान की भरपाई और सख्त नियमों की मांग
व्यापारिक संघों ने मांग की है कि प्रदर्शनों की अनुमति देने के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए जाएं और अनुमति देने से पहले स्थानीय मार्केट एसोसिएशन से परामर्श करना अनिवार्य हो। साथ ही, वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिससे वित्तीय नुकसान की भरपाई सीधे प्रदर्शन आयोजित करने वालों से की जा सके। इस मामले में कानूनी लड़ाई भी शुरू हो चुकी है; एक रेस्टोरेंट मालिक ने 10 अक्टूबर के व्यवधान के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में मुआवजे की याचिका दायर की है, जबकि खान मार्केट एसोसिएशन ने वित्तीय प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल और FAIDA के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएच कृष्णा ने केंद्रीय बाजारों में सड़क प्रदर्शनों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के नाम पर सार्वजनिक सुरक्षा की अनदेखी करना गलत है, क्योंकि प्रदर्शनों के कारण एम्बुलेंस और फायर टेंडर्स जैसे आपातकालीन वाहनों का रास्ता रुक जाता है।
इसी बीच, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने भी कार्रवाई की है। 16 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस में एक नियोजित रैली से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत डिपके को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधों का हवाला देते हुए की है।