दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से व्यापारियों को 14 हजार करोड़ का चपत, भाई दूज तक बैन की मांग

दिल्ली के व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शनों के कारण 14,000 करोड़ के नुकसान का दावा करते हुए भाई दूज तक बैन लगाने की मांग की है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से व्यापारियों को 14 हजार करोड़ का चपत, भाई दूज तक बैन की मांग

राजधानी दिल्ली में त्योहारों के सीजन के बीच लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और रैलियों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि भाई दूज (11 नवंबर 2026) तक शहर में सभी तरह की रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। ट्रेड बॉडी का कहना है कि इन प्रदर्शनों की वजह से व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ रहा है और दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि कनॉट प्लेस, जंतर मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट और पुरानी दिल्ली जैसे प्रमुख इलाकों में होने वाले प्रदर्शनों ने व्यापार को बुरी तरह बाधित किया है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच दिल्ली के व्यापारियों को करीब 14,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा मार रिटेल और होलसेल सेक्टर पर पड़ी है, जिन्हें अकेले 8,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 1,500 करोड़, होटल और पर्यटन क्षेत्र में 500 करोड़ और दिहाड़ी मजदूरों व अनौपचारिक क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।

एक ही दिन में हुआ 11 हजार करोड़ का नुकसान

व्यापारियों ने विशेष रूप से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में हुई रैली का जिक्र किया है। उनका दावा है कि इस एक दिन के प्रदर्शन के कारण करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं, जिससे व्यापार जगत को लगभग 11,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के समय खरीदारी का सबसे ज्यादा दबाव होता है, ऐसे में सड़कों पर होने वाली भीड़ और जाम उनके कारोबार को खत्म कर रहे हैं।

CTI ने सुझाव दिया है कि यदि प्रदर्शन जरूरी हैं, तो पुलिस उन्हें शहर के बाहरी इलाकों जैसे बुराड़ी, अलीपुर, जसौला या यमुना खादर में शिफ्ट करे। ट्रेड बॉडी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर व्यावसायिक रास्तों में रुकावटें जारी रहीं, तो व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां प्रदर्शनकारियों को सौंपने पर मजबूर हो जाएंगे। फिलहाल, 4 नवंबर तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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