दिल्ली में आस्था कुंज पार्क बलात्कार कांड के बाद छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद पूरे शहर में छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। 25 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच लेडी श्रीराम कॉलेज, मिरांडा हाउस, गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज, दौलत राम, सेंट स्टीफंस, हिंदू, रामप्रस्थ, इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज, खालसा, केएमसी और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। छात्र महिलाओं की सुरक्षा में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक मानसिकता को चुनौती देने और बेहतर सड़क प्रकाश व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही तथा सीसीटीवी बुनियादी ढांचे की मांग के लिए 'हम औरतें आजाद हैं' और 'लड़कियों की औकात 20 हजार रुपये है?' जैसे नारों का इस्तेमाल किया।
सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान और पुलिस की कार्रवाई
28 सितंबर 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्र्रन ने कानून प्रवर्तन में व्यवस्थित विफलता की आलोचना की। अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 5 अक्टूबर 2026 तक सार्वजनिक स्थानों का ऑडिट पूरा करने का आदेश दिया है। इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने 5,000 से अधिक स्कूलों और 30 विश्वविद्यालयों में सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया है और अंधेरे वाले स्थानों पर गश्त बढ़ा दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जांच
इस संकट पर राजनीतिक हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 28 सितंबर को सुरक्षा चूकों को स्वीकार किया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 सितंबर को सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की और बेहतर बुनियादी ढांचे तथा कॉलेजों में महिला पुलिस बल की उपस्थिति की मांग की। 27 सितंबर को कांग्रेस नेता अमृता धवन ने राष्ट्रपति भवन की ओर विरोध मार्च का नेतृत्व किया और आपातकालीन बैठक की मांग की। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे संगठन सुधारों की मांग कर रहे हैं। भारत सरकार ने पुलिस की लापरवाही की जांच के लिए आस्था कुंज घटना की विशेष जांच के आदेश दिए हैं।