दिल्ली के पब्लिक टॉयलेट्स की सफाई अब करेंगे छात्र, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

राजधानी दिल्ली में पब्लिक टॉयलेट्स की बदहाली और गंदगी अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी। दिल्ली पब्लिक टॉयलेट हाइजीन को सुधारने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद अनोखा और सख्त कदम उठाया है। अदालत ने अब छात्रों की टीमों को इन शौचालयों की साफ-सफाई और रखरखाव की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है।
यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने 16 अक्टूबर, 2026 को जारी किया। दरअसल, जन सेवा वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला लिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करना 'जीवन के अधिकार' का एक अनिवार्य हिस्सा है।
छात्र करेंगे सरप्राइज चेकिंग, लापरवाही पर गिरेगी गाज
कोर्ट के निर्देशानुसार, अब दिल्ली यूनिवर्सिटी के दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, जामिया मिलिया इस्लामिया के कॉलेज ऑफ सोशल वर्क और अदिति महाविद्यालय के छात्र टीमें बनाएंगी। ये टीमें शहर के पब्लिक टॉयलेट्स का बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण (Surprise Check) करेंगी।
- छात्रों को निरीक्षण के बाद फोटो सबूतों के साथ विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
- यह रिपोर्ट सीधे नगर निगम (MCD) के एडिशनल कमिश्नर को सौंपी जाएगी।
- रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी MCD की होगी।
अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर किसी इलाके में बार-बार गंदगी या कमियां पाई गईं, तो संबंधित डिप्टी कमिश्नर और चीफ इंजीनियर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था की अनुपालन रिपोर्ट 2 नवंबर, 2026 तक जमा करनी होगी।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शहर में नए पब्लिक टॉयलेट ब्लॉक बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। ये नए शौचालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे, जिनमें ऊर्जा दक्षता के लिए ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम और सुरक्षा के लिहाज से एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।