आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण ही जमीनी स्तर पर सेवाओं को मजबूत करेगा: विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पोषण माह के अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण और उनकी भूमिका पर जोर दिया।

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जमीनी स्तर पर सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सशक्तिकरण की वकालत की है। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और लाभार्थियों के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शनिवार को रोहिणी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात कही, जो 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
विजेंद्र गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि सार्थक समर्थन के जरिए पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब इन कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया जाएगा, तभी आंगनवाड़ियों की स्थिति मजबूत होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचेगा जिनके लिए वे बनाई गई हैं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं की फील्ड वर्क और दैनिक जिम्मेदारियों को आसान बनाने के लिए उन्हें बैग और आवश्यक किट भी वितरित किए गए।
सामुदायिक भागीदारी और पोषण पर जोर
यह पूरा कार्यक्रम "हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी" थीम के तहत आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, प्रारंभिक बचपन के विकास और परिवार कल्याण के लिए सामुदायिक केंद्रों में बदलना है। स्पीकर गुप्ता ने बताया कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पोषण सहायता की जरूरत वाले परिवारों के लिए ये फ्रंटलाइन कार्यकर्ता ही संपर्क का पहला बिंदु होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि निरंतर जनभागीदारी से जीती जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बचपन में सही पोषण और विकास ही एक स्वस्थ और उत्पादक समाज की नींव रखता है। इसके लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं, परिवारों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में पोषण अभियान के उद्देश्यों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पोषण जागरूकता को बढ़ावा देना और प्रारंभिक बचपन की देखभाल को मजबूत करना अनिवार्य है। कार्यकर्ताओं को पर्याप्त संसाधन और संस्थागत सहायता प्रदान करना ही कल्याणकारी कार्यक्रमों की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाने का एकमात्र तरीका है।