दिल्ली में लगेंगी 1 लाख स्मार्ट स्ट्रीटलाइट्स, महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम

राजधानी दिल्ली की सड़कों से अंधेरा दूर करने और महिलाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को एंड्रयूज गंज बस स्टॉप से एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत पूरे शहर में 1 लाख स्मार्ट LED स्ट्रीटलाइट्स लगाई जाएंगी, ताकि शहर के 'डार्क स्पॉट्स' को खत्म किया जा सके और महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें।
यह प्रोजेक्ट 'सेवा संकल्प अभियान' का हिस्सा है। दरअसल, महिला छात्राओं ने शहर के कई इलाकों में अंधेरे और असुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया। इस योजना के जरिए न केवल अपराधों पर लगाम लगेगी, बल्कि सड़कों पर होने वाले हादसों में भी कमी आएगी।
तकनीक से लैस होंगी लाइटें, शिकायतों के लिए मिलेगा QR कोड
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी आधुनिक तकनीक है। PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने बताया कि ये स्ट्रीटलाइट्स एक 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (ICCC) से जुड़ी होंगी। इसका मतलब है कि अधिकारी दूर बैठे ही लाइटों की निगरानी कर सकेंगे और खराबी होने पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा।
- QR कोड की सुविधा: हर स्ट्रीटलाइट पर एक QR कोड होगा, जिसे स्कैन करके नागरिक सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
- ऊर्जा की बचत: पुराने सोडियम वेपर लैंप्स को हटाकर स्मार्ट LED लगाए जाएंगे, जिससे अगले पांच सालों में करीब 100 से 300 करोड़ रुपये की बिजली बचत होने का अनुमान है।
- कड़ा नियम: PWD ने 99% फंक्शनलिटी का लक्ष्य रखा है। अगर कोई लाइट खराब होती है और 48 घंटे में ठीक नहीं की जाती, तो ठेकेदार पर 2,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा।
इस पूरी परियोजना की लागत करीब 473 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें इंस्टॉलेशन और पांच साल का रखरखाव शामिल है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिवाली तक 20,000 लाइटें बदल दी जाएं और जनवरी 2027 तक सभी 1 लाख स्मार्ट लाइटें चालू हो जाएं। ये लाइटें मौसम और जरूरत के हिसाब से अपनी रोशनी को कम या ज्यादा (dimmable) करने में सक्षम होंगी।