दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान झुग्गियों को पर्दों से ढंके जाने पर मचा घमासान

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन के दौरान झुग्गी बस्तियों को छिपाने के लिए सफेद और बैंगनी रंग के बैनर या पर्दे लगाने पर एक बड़ा राजनीतिक और सार्वजनिक विवाद खड़ा हो गया है। 10 सितंबर की रात को दक्षिण दिल्ली में नेल्सन मंडेला मार्ग और मुनिरका मार्ग के पास 'कुली कैंप' जैसी बस्तियों को इन कवरिंग्स से ढक दिया गया था। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय शहरी प्रबंधन मानकों को पूरा करने के उद्देश्य से एक व्यापक सौंदर्यीकरण पहल का हिस्सा बताया है। इस परियोजना में 41 प्रमुख सड़कों में सुधार, 23 फूल फव्वारे, 15 फ्लोरल बोर्ड लगाना और 17 गोलचक्करों का नवीनीकरण शामिल है। हालांकि सरकार ने पर्दों के उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय निवासियों के अनुसार यह कार्रवाई 2023 के जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान उठाए गए इसी तरह के कदमों के बाद की गई है।
इस पहल को लेकर विपक्षी नेताओं ने तीखी आलोचना की है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस कदम को विदेशी मेहमानों से गरीबी छिपाने का प्रयास बताया और पर्दों को सरकारी असफलताओं के लिए एक हिजाब करार दिया। आम आदमी पार्टी ने भी इन भावनाओं को दोहराया और केंद्र सरकार पर प्रणालीगत गरीबी को दूर करने के बजाय दिल्ली की वास्तविकता को छिपाने का आरोप लगाया, तथा इन सौंदर्य उपायों की तुलना अपने 'विजन 2027' विकास लक्ष्यों से की।
स्थानीय निवासियों ने इस विकास पर गहरी निराशा व्यक्त की है। मनीषा नाम की एक निवासी ने टिप्पणी की कि इस कृत्य से ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने निवासियों को ढंके जाने वाले कचरे के रूप में देखा। एक अन्य निवासी मनोज ने बताया कि समुदाय को स्क्रीनिंग के लिए कोई औपचारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला था। 13 सितंबर 2026 तक यह बहस जारी है, जिसमें BBC News Hindi जैसे मीडिया आउटलेट इस बात पर जनमत मांग रहे हैं कि क्या उच्च-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय समारोहों के दौरान इस तरह के उपाय उचित हैं।