दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: स्लम रिहैबिलिटेशन पॉलिसी 2026 से 5 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान
दिल्ली सरकार ने स्लम रिहैबिलिटेशन पॉलिसी 2026 लागू की है, जिससे 5 लाख परिवारों को पक्के मकान मिलेंगे। जानें पात्रता और नियम।

दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। दिल्ली सरकार ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली स्लम रिहैबिलिटेशन पॉलिसी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य शहर के करीब 4 से 5 लाख परिवारों को, जिनमें लगभग 20 लाख निवासी शामिल हैं, सुरक्षित और सम्मानजनक स्थायी आवास प्रदान करना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को इस अधिसूचना को जारी करते हुए कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को स्थिरता और सुरक्षा देना है।
इस नई नीति के तहत, वे परिवार जो 1 जनवरी 2025 से पहले बनी झुग्गी बस्तियों में रह रहे हैं, पुनर्वास के लिए पात्र होंगे। सरकार ने 'जहाँ झुग्गी, वहाँ मकान' के मंत्र पर जोर दिया है, ताकि लोगों को उनके मौजूदा स्थान पर या वहां से अधिकतम तीन किलोमीटर के दायरे में घर दिया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि लोगों की शिक्षा और रोजगार पर कोई बुरा असर न पड़े।
पॉलिसी की मुख्य बातें और सुविधाएं
पात्र परिवारों को 1-BHK (एक बेडरूम, हॉल और किचन) का फ्लैट आवंटित किया जाएगा। ये आवासीय परिसर केवल मकानों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि यहाँ स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य सुविधाओं और खेल के मैदानों जैसे बुनियादी सामाजिक ढांचे का भी विकास किया जाएगा। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र परिवार को वैकल्पिक आवास दिए बिना बेदखल नहीं किया जाएगा।
- विशेष प्राथमिकता: दिव्यांगजनों के लिए ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट आवंटित करने का प्रावधान है।
- पारदर्शिता: फ्लैटों का आवंटन कंप्यूटर आधारित ड्रा (draw-of-lots) के जरिए होगा और निगरानी के लिए GIS-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।
- संयुक्त आवंटन: विवाहित जोड़ों के लिए आवास का आवंटन संयुक्त रूप से किया जाएगा।
- रखरखाव: शुरुआती पांच वर्षों तक आवासीय परिसरों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा का प्रबंधन सरकार करेगी, जिसके बाद यह जिम्मेदारी लाभार्थी संघों को सौंप दी जाएगी।
इसके अलावा, यदि एक ही ढांचे की अलग-अलग मंजिलों पर स्वतंत्र परिवार रह रहे हैं, तो पात्रता और दस्तावेजों के आधार पर उन्हें अलग-अलग यूनिट देने पर विचार किया जा सकता है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत काम करने वाले डेवलपर्स को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ट्रांजिशन पीरियड के दौरान प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास, किराया या वित्तीय सहायता प्रदान करें।