दिल्ली में बढ़ रहा स्केटिंग का क्रेज, लेकिन बुनियादी ढांचे की भारी कमी से जूझ रहे खिलाड़ी

दिल्ली में स्केटिंग का खेल तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें कम्युनिटी तथा कोच अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस संबंध में एक रिपोर्ट Indian Express द्वारा 10 अगस्त 2026 को अपडेट की गई है। स्केटिंग के बढ़ते शौक के बावजूद शहर में खिलाड़ियों के लिए पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कमी बनी हुई है। दिल्ली स्केटिंग कम्युनिटी (DSC) की शुरुआत 2022 में हुई थी और दिल्ली स्केटबोर्डिंग अकादमी साल 2016 से चल रही है, जो अब तक करीब एक हजार स्केटर्स को ट्रेनिंग दे चुकी है।
बुनियादी ढांचे की कमी और चुनौतियां
खिलाड़ियों के लिए समर्पित पब्लिक स्पेस न होने के कारण उन्हें पार्कों, मेट्रो स्टेशनों और सड़कों पर प्रैक्टिस करनी पड़ती है। इस दौरान उन्हें अक्सर पुलिस, आम जनता या सड़क पर घूमने वाले जानवरों के कारण वहां से हटाना पड़ता है। दिल्ली स्केटबोर्डिंग अकादमी चलाने वाले सुरजीत कुमार बताते हैं कि यह माहौल थोड़ा अव्यवस्थित है। उनके चार ट्रेनी इस साल एशियाई चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कम्युनिटी के सदस्य सिद्धार्थ और सुरजीत दोनों ने इस लगातार बढ़ती कम्युनिटी के लिए प्रॉपर पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर दिया है। इसके अलावा, टोक्यो 2020 से ओलंपिक खेल का दर्जा पा चुका स्केटबोर्डिंग, भारत की सरकारी स्पोर्ट्स स्कीमों में शामिल नहीं है।
नई सुविधाएं और खिलाड़ियों की सफलता
इन्फ्रास्ट्रक्चर की इन कमियों को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा द्वारका में दिल्ली के पहले इंटरनेशनल लेवल के आइस स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जा रहा है, जिसके अगस्त 2026 तक खुलने की उम्मीद है। आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISAI) और रोलर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (RSFI), दोनों के सचिवालय नई दिल्ली में हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के तहत इन खेलों का संचालन और नियमन करते हैं। हाल की खेल उपलब्धियों में दिल्ली के स्केटर एकलव्य जगल ने 25 से 30 जून 2026 तक आयोजित 21वीं नेशनल आइस स्केटिंग चैंपियनशिप में तीन व्यक्तिगत गोल्ड मेडल और रिले में एक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।